देहरादून: करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुकी है. शुक्रवार को उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से पहला दल सफलतापूर्वक तिब्बत पहुंच गया. सीमा पर औपचारिक जांच पूरी होने के बाद यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई. इस बार बेहतर सड़क संपर्क और सीमित पैदल यात्रा ने श्रद्धालुओं का सफर पहले की तुलना में काफी आसान बना दिया है. प्रशासन पूरे मार्ग पर सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है.
शुक्रवार सुबह नाभीढांग से रवाना हुआ 52 सदस्यीय पहला दल लिपुलेख दर्रा पार कर तिब्बत पहुंच गया. दल में 48 श्रद्धालु, एक चिकित्सा कर्मी और तीन किचन स्टाफ शामिल थे. आईटीबीपी के जवान यात्रियों को सीमा तक लेकर पहुंचे. चीनी सुरक्षा एजेंसियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद सभी यात्रियों को अगले चरण की यात्रा के लिए अनुमति दे दी.
इसी दिन दूसरा दल धारचूला से गुंजी के लिए रवाना हुआ. तवाघाट-गुंजी मार्ग पर भूस्खलन के कारण सड़क कुछ समय के लिए बंद हो गई, जिससे यात्रियों को करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा. रास्ता खुलने के बाद सभी श्रद्धालु सुरक्षित गुंजी पहुंच गए. प्रशासन और केएमवीएन ने पूरे मार्ग पर भोजन, आवास, स्वास्थ्य और सुरक्षा की व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं.
इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा की कुल दूरी 1738 किलोमीटर है. इसमें लगभग 1690 किलोमीटर सफर वाहनों से तय होगा, जबकि केवल 38 किलोमीटर पैदल ट्रेक करना होगा. वर्ष 2019 से पहले श्रद्धालुओं को 60 किलोमीटर से अधिक कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती थी. अब भारत और चीन की ओर सड़क बनने से बुजुर्गों और पहली बार यात्रा करने वालों के लिए सफर काफी सुविधाजनक हो गया है.
कैलाश मानसरोवर यात्रा वर्ष 2020 से बंद थी. पहले कोरोना महामारी और बाद में पूर्वी लद्दाख के गलवान क्षेत्र में भारत-चीन सीमा तनाव के कारण इसका संचालन नहीं हो सका. दोनों देशों के बीच सहमति बनने के बाद इस वर्ष यात्रा दोबारा शुरू हुई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 5 जुलाई को टनकपुर से पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था.
इस वर्ष की यात्रा को धार्मिक मान्यताओं के कारण भी विशेष माना जा रहा है. मान्यता है कि 60 वर्षों बाद बन रहे अग्नि अश्व वर्ष का आध्यात्मिक महत्व बेहद खास है. तिब्बती ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष की गई एक परिक्रमा सामान्य वर्षों की 12 परिक्रमा के बराबर फल देती है. इसी कारण देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यात्रा में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है.