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नेपाल-चीन बॉर्डर पर सुरक्षा होगी और मजबूत! अमित शाह की बैठक में उत्तराखंड पुलिस का बड़ा प्लान

नई दिल्ली में आयोजित देश की पहली लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड पुलिस ने सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग मॉडल प्रस्तुत किया. सम्मेलन में आधुनिक सुरक्षा, बेहतर समन्वय और जनभागीदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
नेपाल-चीन बॉर्डर पर सुरक्षा होगी और मजबूत! अमित शाह की बैठक में उत्तराखंड पुलिस का बड़ा प्लान
Courtesy: social media

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 'लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस-2026' में उत्तराखंड ने सक्रिय भागीदारी निभाई. राज्य के पुलिस अधिकारियों ने सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा, सामुदायिक सहयोग और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े अपने अनुभव साझा किए, जिन्हें सम्मेलन में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया.

सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा पर विशेष चर्चा

सम्मेलन में उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने राज्य के पांच सीमावर्ती जिलों उधम सिंह नगर, पिथौरागढ़, चंपावत, उत्तरकाशी और चमोली के पुलिस अधीक्षकों के साथ हिस्सा लिया. इन जिलों की सीमाएं नेपाल और तिब्बत से जुड़ी हैं. गृह सचिव शैलेश बगौली, महानिदेशक अभिनव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन में भाग लिया. इस दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.

सामुदायिक पुलिसिंग मॉडल की हुई प्रस्तुति

'सीमा विकास के लिए सामुदायिक जुड़ाव' विषय पर आयोजित सत्र में चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने उत्तराखंड पुलिस के जनभागीदारी आधारित मॉडल को प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि विश्वास, सूचना, भागीदारी, क्षमता निर्माण तथा प्रोत्साहन एवं सुरक्षा जैसे पांच प्रमुख स्तंभों के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है. इस मॉडल का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के सहयोग से सीमा क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित बनाना है.

आधुनिक और जन-केंद्रित सुरक्षा व्यवस्था पर जोर

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि यह सम्मेलन सीमावर्ती जिलों में आधुनिक, समन्वित और नागरिक-केंद्रित सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में अहम पहल है. उन्होंने विश्वास जताया कि विभिन्न राज्यों के अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान से उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी. साथ ही विकास कार्यों और स्थानीय लोगों की भागीदारी को भी नई गति मिलेगी.