उत्तराखंड: उत्तराखंड अब अपने बढ़ते बाघों को दूसरे राज्यों को भेजने की तैयारी कर रहा है. राज्य सरकार उन राज्यों को बाघ उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है जहां टाइगरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है. यह फैसला स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की हालिया बैठक में चर्चा का विषय बना.
उत्तराखंड में बाघों की संख्या पिछले 20 सालों में काफी तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2006 में यहां सिर्फ 178 बाघ थे, जो अब बढ़कर 560 हो गए हैं. स्टेट ऑफ टाइगर्स 2022 रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या तीन गुना से भी ज्यादा हो गई है. सबसे ज्यादा 260 बाघ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हैं. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बेहतर सुरक्षा, नियमित निगरानी और अच्छे आवास प्रबंधन की वजह से यह बढ़ोतरी हुई है.
अधिकारियों के मुताबिक अगर दूसरे राज्यों को बाघ दिए जाते हैं तो सबसे पहले नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की अनुमति जरूरी होगी. पहले भी कॉर्बेट से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों को शिफ्ट किया गया था और NTCA की मंजूरी ली गई थी. नई योजना में भी वैज्ञानिक सर्वे, स्वास्थ्य जांच और सभी जरूरी अनुमतियों के बाद ही बाघों को भेजा जाएगा. इससे देश में बाघों की कुल संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी.
बाघों की बढ़ती आबादी अच्छी खबर है, लेकिन यह वन विभाग के लिए नई चुनौती भी बन गई है. टाइगर रिजर्व के बाहर के जंगलों, वन क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में बाघों की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है. कई बाघ नई जगहों की तलाश में घूम रहे हैं. इससे गांवों, खेतों और आबादी वाले इलाकों में मानव-बाघ संघर्ष का खतरा बढ़ गया है.
वन अधिकारी बताते हैं कि बाघ अब अपने पुराने क्षेत्र से बाहर निकलकर नए इलाकों में बस रहे हैं. इससे कभी-कभी पशुओं पर हमले या इंसानों के साथ सामना हो जाता है. विभाग इन स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है और जागरूकता कार्यक्रम भी चला रहा है.