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देहरादून में चौंकाने वाला मामला, मृत महिला को जिंदा समझकर भटकते रहे परिजन; 4 अस्पतालों ने किया इलाज

देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में एक बेहद दुखद और लापरवाही भरा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक 25 वर्षीय महिला की मौत के बाद उसके परिजन उसे जिंदा समझकर घंटों तक शव लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे.

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Edited By: Antima Pal
देहरादून में चौंकाने वाला मामला, मृत महिला को जिंदा समझकर भटकते रहे परिजन; 4 अस्पतालों ने किया इलाज
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देहरादून: देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में एक बेहद दुखद और लापरवाही भरा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक 25 वर्षीय महिला की मौत के बाद उसके परिजन उसे जिंदा समझकर घंटों तक शव लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे. चार अलग-अलग अस्पतालों में ले जाने के बावजूद किसी ने भी परिजनों को मौत की सच्चाई नहीं बताई.

देहरादून में चौंकाने वाला मामला

आखिरकार 20 किलोमीटर दूर एक अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि महिला की काफी पहले ही मौत हो चुकी है. मामला सहसपुर कोतवाली क्षेत्र के बैरागीवाला गांव का है. रविवार को महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई. परिजन उसे तुरंत हरबर्टपुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने पहुंचे. 

मृत महिला को जिंदा समझकर भटकते रहे परिजन

आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान ही महिला की मौत हो गई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी. बल्कि अस्पताल ने पुलिस को मौत की सूचना दे दी, पर परिवार को नहीं बताया. परिजन महिला को अभी भी जिंदा मानकर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में ले गए. 

 4 अस्पतालों ने किया इलाज

उन्होंने तीन और अस्पतालों में दाखिल करने की कोशिश की, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने या तो इलाज से मना कर दिया या मौत की बात छिपाई. घंटों की मशक्कत के बाद परिजन झाझरा स्थित एक अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच की और स्पष्ट बताया कि महिला की मौत हो चुकी है. तब जाकर परिजनों को सच्चाई का पता चला. 

शाम करीब 7 बजे हरबर्टपुर अस्पताल की सूचना पर सहसपुर पुलिस गांव पहुंची और पोस्टमॉर्टम के लिए शव मांगा. लेकिन परिजनों और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया. बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। ढाई घंटे तक चले इस हंगामे में परिजन काफी आक्रोशित थे. उन्होंने अस्पतालों की घोर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि अगर समय पर सच्चाई बताई जाती तो इतना दर्द नहीं सहना पड़ता.