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देवताओं के साथ उत्तराखंड के इस मंदिर में पूजे जाते हैं दानव, ऐसे भेजा जाता है बुलावा

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में राहू मंदिर अपनी अनोखी मान्यता की वजह से पूरे देश में मशहूर है. कहा जाता है कि इस मंदिर में देवताओं के साथ राहू की भी पूजे जाते हैं. यही वजह है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है.

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Edited By: Babli Rautela
देवताओं के साथ उत्तराखंड के इस मंदिर में पूजे जाते हैं दानव, ऐसे भेजा जाता है बुलावा
Courtesy: AI

भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जो अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए मशहूर हैं. उत्तराखंड के पौड़ी जिले के इस राहू मंदिर की कहानी आज भी लोगों को चौंका देती है. मान्यता है की इस मंदिर में केवल देवी देवताओं ही नहीं होती बल्कि राहू की भी आराधना की जाती है. यही वजह है कि यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है. हिमालय की शांत वादियों से घिरे पैठाणी गांव में यह मंदिर लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक माना जाता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से पूजा करने पर राहू दोष और जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है.

समुद्र मंथन से जुड़ी है मंदिर की कथा

इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी पौराणिक कथा है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत निकला तो राहू ने छल से देवता का रूप धारण कर अमृत पी लिया था. जैसे ही भगवान विष्णु को इस बात का पता चला उन्होंने सुदर्शन चक्र से राहू का सिर धड़ से अलग कर दिया. कहा जाता है कि राहू का कटा हुआ सिर उत्तराखंड के इसी जगह पर गिरा था. बाद में यहां मंदिर बनाया गया और राहू की प्रतिमा स्थापित की गई. तभी से यह स्थान श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बन गया.

भगवान शिव के साथ होती है राहू की पूजा

इस मंदिर में भगवान शिव और राहू दोनों की पूजा की जाती है. वहां के लोगों का मानना है कि भगवान शिव की कृपा और राहू की शांति के लिए यह मंदिर बेहद पवित्र स्थान है. दूर दूर से लोग यहां पूजा कराने पहुंचते हैं.  खासकर वे लोग जो अपनी कुंडली में राहू की खराब स्थिति से परेशान होते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां पूजा करने से मानसिक तनाव और अशुभ प्रभाव कम होते हैं. बता दें की यह मंदिर पश्चिममुखी है और इसकी बनावट उत्तराखंड की पारंपरिक शैली को दर्शाती है. यहां का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराता है. पहाड़ों के बीच यह मंदिर प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम है.

यह मंदिर पूर्वी और पश्चिमी नयार नदियों के संगम पर बना है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संगम स्थल हमेशा से पूजा के लिए पवित्र माने जाते हैं. यही कारण है कि इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है. संगम के आसपास का दृश्य बेहद सुंदर दिखाई देता है.