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रिश्तेदार बनकर ठग ने उड़ाए 2.30 लाख रुपये, मोबाइल हैक कर रची साजिश

भगवानपुर में एक युवक साइबर ठगी का शिकार हो गया. ठग ने रिश्तेदार का मोबाइल हैक कर मदद के नाम पर 2.30 लाख रुपये मंगवा लिए. बाद में सच्चाई सामने आने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई.

KanhaiyaaZee
रिश्तेदार बनकर ठग ने उड़ाए 2.30 लाख रुपये, मोबाइल हैक कर रची साजिश
Courtesy: AI Generated

भगवानपुर: साइबर अपराधी लगातार लोगों को नए-नए तरीकों से निशाना बना रहे हैं. भगवानपुर में एक युवक को उसके रिश्तेदार का भरोसा इतना महंगा पड़ गया कि वह 2.30 लाख रुपये गंवा बैठा. ठग ने रिश्तेदार का मोबाइल हैक कर खुद को उसी के रूप में पेश किया और विदेश में दस्तावेज फंसने की कहानी सुनाकर मदद मांगी. कुछ दिन बाद जब सच्चाई सामने आई, तब पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का पता चला.

पीड़ित मुर्सलीन ने पुलिस को बताया कि उसका एक रिश्तेदार सऊदी अरब में नौकरी करता है. एक जुलाई को उसी के मोबाइल नंबर से कॉल आई. फोन करने वाले ने कहा कि विदेश में उसके जरूरी दस्तावेज अटक गए हैं और उन्हें छुड़ाने के लिए तत्काल पैसों की जरूरत है.

भरोसा जीतकर खाते में मंगवाए रुपये

फोन करने वाले ने 2.30 लाख रुपये की मांग की और भरोसा दिलाया कि रकम जल्द लौटा दी जाएगी. उसने एक बैंक खाता नंबर भी भेजा. पीड़ित के अनुसार, कॉल करने वाले की आवाज उसके रिश्तेदार जैसी ही लग रही थी. इसी भरोसे में उसने बताए गए खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी.

कुछ दिन बाद खुली ठगी की पोल

जब काफी समय बीतने के बाद भी रुपये वापस नहीं मिले, तो मुर्सलीन ने अपने रिश्तेदार से सीधे संपर्क किया. रुपये की बात सुनकर वह हैरान रह गया. उसने साफ बताया कि उसने किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं मांगी थी. हालांकि उसने यह भी बताया कि एक जुलाई को उसका मोबाइल कुछ समय के लिए हैक हो गया था.

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

ठगी की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की. पुलिस ने तहरीर के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. जांच एजेंसियां बैंक खाते और कॉल से जुड़े तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं.

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

भगवानपुर कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक रमेश सैनी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम पर पैसे भेजने से पहले दूसरे माध्यम से उसकी पुष्टि जरूर करें, ताकि इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सके.