ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हरिद्वार प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया है. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पुलिस ने जिले के विभिन्न धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया और तय मानकों से अधिक ध्वनि में संचालित लाउडस्पीकर हटवा दिए. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
हरिद्वार पुलिस ने पूरे जिले में धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण की स्थिति का आकलन करने के लिए विशेष अभियान चलाया. इस दौरान शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने निरीक्षण किया. जांच में कई स्थानों पर लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित पाए गए. इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ऐसे कुल 94 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटवा दिए. प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई केवल न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है.
अभियान के दौरान शहर क्षेत्र के 31 धार्मिक स्थलों और ग्रामीण क्षेत्र के 63 धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की गई. पुलिस अधिकारियों ने संबंधित प्रबंधन समितियों से बातचीत कर उन्हें ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की जानकारी दी. साथ ही यह भी समझाया गया कि धार्मिक गतिविधियों का संचालन कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े.
हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य किसी धार्मिक गतिविधि को बाधित करना नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेशों का पालन कराना और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रखना है. उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक संस्थानों को नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है. प्रशासन चाहता है कि भविष्य में ऐसे मामलों में कार्रवाई की नौबत ही न आए और सभी संस्थान स्वेच्छा से निर्धारित मानकों का पालन करें.
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में कोई धार्मिक स्थल निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर का उपयोग करता पाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का मानना है कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण से नागरिकों को शांत वातावरण मिलेगा और न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी पालन भी सुनिश्चित होगा. अभियान आगे भी जारी रहेगा और समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण किए जाएंगे.