गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों के पोषण और शुरुआती शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया. उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजें, जहां उन्हें पौष्टिक भोजन के साथ-साथ खेल-आधारित शिक्षा भी मिलेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बच्चों के समग्र विकास के लिए सुपोषण मिशन, बाल वाटिका और प्री-प्राइमरी शिक्षा कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ा रही है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों पर निर्भर करता है. इसलिए बचपन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. यदि इस दौरान सही पोषण और देखभाल मिले तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे जीवन पर पड़ता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवारों को बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के प्रति अधिक जागरूक होने की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ी मजबूत और आत्मनिर्भर बन सके.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण की समस्या को खत्म करने के लिए गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है. उनका मानना है कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में टेक होम राशन (टीएचआर) व्यवस्था की शुरुआत की थी, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद से पोषण सामग्री तैयार की जा रही है जिससे जरूरतमंद परिवारों तक बेहतर सुविधाएं पहुंच रही हैं.
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी शिक्षा और बाल वाटिका कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. यहां बच्चों को अनुपूरक पोषण आहार के साथ अक्षर ज्ञान, खेल-आधारित गतिविधियां और स्कूल जैसे वातावरण में सीखने का अवसर मिलता है. उन्होंने कहा कि सुपोषण मिशन के दूसरे चरण से आने वाले समय में लगभग दो करोड़ बच्चों को लाभ मिलने की संभावना है. मुख्यमंत्री के अनुसार, यह पहल बच्चों को स्कूल शिक्षा के लिए तैयार करने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.