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आज आएगी UP SIR की फाइनल मतदाता सूची, बदलेंगे चुनावी समीकरण? पार्टियों की रणनीति पर पड़ेगा बड़ा असर

उत्तर प्रदेश में आज फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी. साढ़े पांच महीने चले पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या और प्रोफाइल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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Edited By: Babli Rautela
आज आएगी UP SIR की फाइनल मतदाता सूची, बदलेंगे चुनावी समीकरण? पार्टियों की रणनीति पर पड़ेगा बड़ा असर
Courtesy: X

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. साढ़े पांच महीने तक चले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बाद आज फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी. इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप से मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा जारी करेंगे. यह नई मतदाता सूची सिर्फ एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला एक बड़ा आधार भी साबित होगी.

प्रदेश में एसआईआर अभियान की शुरुआत पिछले साल 27 अक्टूबर से हुई थी. इस दौरान मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करने के लिए बड़े स्तर पर सत्यापन किया गया. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 6 जनवरी को जारी की गई थी जिसमें कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए थे. इसके बाद सूची घटकर 12.55 करोड़ रह गई थी. इस दौरान दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया भी चलाई गई जिसमें लोगों को अपने दस्तावेज पेश करने का मौका दिया गया.

क्यों कटे इतने बड़े पैमाने पर नाम?

इस बार बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. मृतक मतदाता, स्थान बदल चुके लोग, डुप्लीकेट एंट्री और अप्रमाणित रिकॉर्ड वाले नामों को हटाया गया है. इसके अलावा कई पुराने रिकॉर्ड भी सत्यापन में सही नहीं पाए गए. वर्ष 2003 की मतदाता सूची से जुड़े करीब 1.04 करोड़ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सके. वहीं 2.22 करोड़ मामलों में तार्किक विसंगतियां पाई गईं. जिन लोगों ने समय पर अपने दस्तावेज जमा नहीं किए उनके नाम अंतिम सूची से हटा दिए गए हैं.

अनुमान है कि इस बार अंतिम मतदाता सूची में करीब 13.35 करोड़ मतदाता शामिल होंगे. यह संख्या पिछले साल की तुलना में लगभग दो करोड़ कम हो सकती है. हालांकि इसमें नए मतदाताओं की भी बड़ी संख्या जुड़ी है. 27 अक्टूबर से 6 मार्च के बीच करीब 86.69 लाख नए आवेदन फार्म 6 के जरिए जमा किए गए. वहीं 3.18 लाख आवेदन नाम हटाने के लिए फार्म 7 के तहत आए.

चुनावी रणनीति पर पड़ेगा असर

नई वोटर लिस्ट का सबसे बड़ा असर राजनीतिक दलों की रणनीति पर पड़ेगा. किस क्षेत्र में कितने मतदाता बढ़े या घटे हैं, किस वर्ग का प्रभाव बढ़ा है और कहां वोटिंग पैटर्न बदल सकता है, यह सब इस सूची से साफ हो जाएगा. पार्टियां अब बूथ स्तर पर अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करेंगी. खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां बड़ी संख्या में नाम जुड़े या हटे हैं.

मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन प्रशासन के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर आता है. अब इसी सूची के आधार पर मतदान केंद्रों की तैयारी, बूथ मैनेजमेंट और चुनावी व्यवस्था तय की जाएगी. यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि हर पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल हो और कोई भी योग्य व्यक्ति मतदान से वंचित न रहे.