नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है. 'ईरान इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ रुकी हुई रणनीतिक वार्ता को दोबारा शुरू करने के लिए एक बेहद बड़ी और अनिवार्य शर्त रख दी है. तेहरान का कहना है कि वाशिंगटन के साथ किसी भी कूटनीतिक रोडमैप पर आगे बढ़ने से पहले कतर में जमा उसकी 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति को तुरंत जारी किया जाए.
इस गोपनीय वार्ता से सीधे जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईरान द्वारा मांगी गई यह 12 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि सिर्फ एक शुरुआती किस्त मात्र है. तेहरान ने साफ कर दिया है कि यह उसकी पूरी विदेशी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह केवल बातचीत की मेज पर आने का टोकन मनी है. ईरान ने अमेरिकी प्रशासन को यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अंतिम और स्थायी समझौते के तहत दुनिया भर में जमे उसके सभी विदेशी एसेट्स को बिना शर्त अनफ्रीज करना होगा.
ईरान के शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी आधिकारिक समाचार एजेंसी तसनीम ने इस वार्ता पर एक बड़ा अपडेट दिया है. एजेंसी के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MoU) के एक या दो बेहद संवेदनशील बिंदुओं पर अभी भी गंभीर असहमति बनी हुई है. ईरान चाहता है कि बातचीत के अंतिम चरण में जाने से पहले उसके फंड का एक हिस्सा जारी हो और भविष्य में इस पैसे के इस्तेमाल पर कोई अमेरिकी पाबंदी न रहे.
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय समझौते का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक बिंदु दुनिया के सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्ग 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित खोलना है. अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, तैयार किए गए शुरुआती मसौदे में यह सहमति बनी है कि इस समुद्री रास्ते पर ईरान कोई टोल टैक्स नहीं वसूलेगा. इसके साथ ही ईरान इस पूरे समुद्री क्षेत्र में बिछाई गई अपनी घातक नौसैनिक बारूदी सुरंगों को भी पूरी तरह हटा लेगा.
इस बड़े कदम के बदले में, अमेरिकी प्रशासन भी ईरान के महत्वपूर्ण व्यापारिक बंदरगाहों पर लगी अपनी सख्त आर्थिक पाबंदियों में काफी ढील देगा. अमेरिका इस क्षेत्र में जारी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी के कुछ हिस्सों को वापस ले लेगा, जिससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से आज़ादी के साथ कच्चे तेल का निर्यात शुरू करने का मौका मिल सकेगा. इस प्रस्तावित शांति समझौते में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे या उनके सहयोगियों पर हमला न करने की लिखित प्रतिबद्धता भी शामिल है.
इस बीच, परमाणु कार्यक्रम और समृद्ध यूरेनियम के भंडार से जुड़े विवादित मुद्दों पर केवल अंतिम चरण में 60 दिवसीय संघर्ष-विराम के बाद ही चर्चा होगी. हालांकि, ईरान को परमाणु हथियार बनाने की हर कोशिश को तुरंत रोकना होगा. इसी सिलसिले में ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़, विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची और अब्दोलनासेर हेम्मती कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से अंतिम दौर की बातचीत के लिए कतर की राजधानी दोहा पहुंच चुके हैं.