उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा और रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे. इस परियोजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी सहयोग देगा, जबकि कई निजी कंपनियां भी इसमें भागीदारी करेंगी.
प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में एक हजार से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट लगाने की योजना तैयार की है. इस अभियान के तहत स्थायी और पोर्टेबल दोनों प्रकार के प्लांट लगाए जाएंगे. सरकार ग्रामीण परिवारों को इस योजना से जोड़ने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा भी तैयार कर रही है. योजना का उद्देश्य गोबर का बेहतर उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना और गांवों की आय बढ़ाना है.
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी साझेदार के रूप में कार्य करेगा. संस्थान प्लांट की डिजाइन, संचालन, रखरखाव और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा. इसके अलावा बायोगैस क्षेत्र में काम करने वाली 15 से अधिक अग्रणी कंपनियों ने भी इस अभियान में रुचि दिखाई है. इससे आधुनिक तकनीक और उद्योगों का अनुभव सीधे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा, जिससे परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी.
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश की गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ‘रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी. भविष्य में कार्बन क्रेडिट जैसे नए अवसरों पर भी काम किया जाएगा. इससे ग्रामीण युवाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे.
बायोगैस प्लांट से बनने वाली गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जाएगा, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम होगी. वहीं प्लांट से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल होगी. इससे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटेगा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा. सरकार का मानना है कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश को गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.