ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR अभियान को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है. इसका मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट की जांच कर पुराने, गलत और डुप्लीकेट नामों को हटाना है. लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या इस अभियान का असर पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर पर भी पड़ेगा.
क्या उनका वोटर आईडी कार्ड बन सकता है या उन्हें नोएडा छोड़ना पड़ सकता है. इन सवालों के बीच यह साफ करना जरूरी है कि SIR सिर्फ मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया है और इसका किसी नागरिकता मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है. सीमा हैदर पाकिस्तान के कराची की रहने वाली हैं और 2023 में PUBG गेम के जरिए उनकी पहचान नोएडा के सचिन मीणा से हुई थी.
रिपोर्ट के अनुसार दोनों नेपाल में मिले और शादी करने के बाद सीमा अपने चार बच्चों के साथ भारत आ गईं. नोएडा में रहने के दौरान सीमा पर अवैध प्रवेश और फर्जी पहचान का मामला दर्ज हुआ था. हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई और तभी से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या SIR अभियान सीमा हैदर के मामले को प्रभावित कर सकता है. इसका जवाब है कि SIR का सीमा से कोई सीधा संबंध नहीं है. यह अभियान सिर्फ वोटर लिस्ट को सही करने के लिए चलाया जा रहा है. सीमा हैदर वर्तमान में अवैध प्रवेश के मामले में कोर्ट की निगरानी में हैं और जमानत पर हैं. इसलिए SIR का उनके रहने या आवागमन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.
इसका उद्देश्य संदिग्ध पहचान की जांच करना नहीं बल्कि वोटर सूची में मौजूद गलत या डुप्लीकेट एंट्री को हटाना है. SIR न तो किसी को घर खाली कराने का आदेश देता है और न ही किसी को क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है. यह न तो पुलिस जांच जैसा है और न ही नागरिकता संबंधी कोई कार्रवाई करता है.
सीमा के वकील एपी सिंह का कहना है कि सीमा का मामला मानवीय आधार और जीवनदान से जुड़ा है. यह राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका के तहत लंबित है. उनका दावा है कि पाकिस्तान द्वारा दस्तावेजों के सहयोग न देने से भी मामले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. हालांकि, अगर किसी स्थिति में सीमा ने किसी भारतीय पहचान दस्तावेज जैसे वोटर आईडी के लिए आवेदन किया होता तो SIR टीम सवाल उठा सकती थी. लेकिन अभी तक ऐसा कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया है.