लखनऊ: अगर आपका मोबाइल चोरी हो गया है, बाइक गायब हो गई है या किसी साइबर ठग ने बैंक खाते से रकम निकाल ली है, तो अब हर बार थाने के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. कई मामलों में आप घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस की व्यवस्था के तहत कुछ खास परिस्थितियों में e-FIR की सुविधा उपलब्ध है. साथ ही कानून नागरिकों को शिकायत पर कार्रवाई न होने की स्थिति में भी कई अधिकार देता है.
उत्तर प्रदेश पुलिस के नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है, जहां आरोपी की पहचान न हो और घटना में गंभीर शारीरिक हिंसा शामिल न हो. इसमें वाहन चोरी, मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट चोरी, जरूरी दस्तावेज खोना, घर या दुकान का ताला टूटना, ऑनलाइन बैंक धोखाधड़ी और सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने जैसे मामले शामिल हैं.
कई लोग मानते हैं कि थाने की मुहर और अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना शिकायत मान्य नहीं होती. जबकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत डिजिटल रूप से जारी e-FIR को कानूनी मान्यता प्राप्त है. यही कॉपी वाहन बीमा क्लेम, नया सिम कार्ड, पासपोर्ट या अन्य जरूरी दस्तावेज दोबारा जारी कराने में भी स्वीकार की जाती है.
यदि स्थानीय पुलिस वैध शिकायत पर कार्रवाई नहीं करती, तो सबसे पहले संबंधित जिले के एसपी या एसएसपी को लिखित शिकायत भेजी जा सकती है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल पर भी पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है. जरूरत पड़ने पर संबंधित अदालत में भी कानूनी आवेदन किया जा सकता है.
अगर सभी प्रयासों के बाद भी सुनवाई नहीं होती, तो नागरिक बीएनएसएस की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन कर सकते हैं. यदि अदालत को शिकायत प्रथम दृष्टया सही लगती है, तो वह पुलिस को मामला दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश दे सकती है. यह व्यवस्था नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाई गई है.
हर शिकायत FIR नहीं होती. कम गंभीर मामलों को सामान्यतः NCR की श्रेणी में रखा जाता है, जिनमें जांच शुरू करने से पहले अदालत की अनुमति आवश्यक होती है. वहीं लूट, साइबर फ्रॉड, हत्या या डकैती जैसे गंभीर मामलों में FIR दर्ज की जाती है. ऐसे मामलों में पुलिस बिना अदालत की अनुमति के भी तुरंत जांच शुरू कर सकती है और जरूरत पड़ने पर आरोपी को गिरफ्तार भी कर सकती है.