मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है. यहां कछवा थाना क्षेत्र के जोगीपुरवा गांव में रहने वाले एक 17 वर्षीय किशोर में रेबीज के खतरनाक लक्षण विकसित हो गए हैं. चार महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद परिवार द्वारा टीकाकरण का कोर्स अधूरा छोड़ने की एक छोटी सी भूल अब उस पर भारी पड़ रही है. वर्तमान में किशोर की हालत इतनी गंभीर है कि वह इंसानों की तरह बोलने के बजाय कुत्तों की तरह भौंक रहा है.
जानकारी के मुताबिक, भाईलाल का बेटा चार महीने पहले अपने ननिहाल गया था, जहां उसे एक आवारा कुत्ते ने काट लिया. उस समय उसे पहला इंजेक्शन ननिहाल में और दूसरा कछवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगवाया गया. इसके बाद परिवार ने लापरवाही दिखाई और बाकी के चार जरूरी इंजेक्शन नहीं लगवाए. कोर्स अधूरा रहने के कारण वायरस ने उसके शरीर पर कब्जा कर लिया और अब वह आठवीं कक्षा का छात्र पहचान से बाहर हो गया है.
Boy from Mirzapur, bitten by dog 4 months ago, received only 2 rabies vaccine doses. Now barks & behaves like a dog. Doctor: incomplete course, almost no chance of survival. 💔
pic.twitter.com/kfrfsDu45x— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 14, 2026Also Read
- यूपी पुलिस परीक्षा में 'पंडित' विकल्प पर छिड़ा सियासी घमासान, योगी सरकार ने दिए सख्त जांच के आदेश
- UP SI परीक्षा में अवसरवादी के लिए 'पंडित' विकल्प के इस्तेमाल पर बवाल, छात्रों ने कहा- यह ब्राह्मण समाज को बदनाम करने की साजिश
- 'कांग्रेस की दलित-विरोधी मानसिकता के कारण ही हुआ BSP का जन्म', मायावती का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार
यह मामला तब उजागर हुआ जब दिव्यांग पिता अपने बेटे को जमुआ चौराहे स्थित हनुमान मंदिर और श्री राम जानकी मंदिर लेकर पहुंचे. वहां वह भगवान से मन्नत मांग रहे थे कि उनका बेटा ठीक हो जाए. मंदिर परिसर में जब लोगों ने किशोर को कुत्तों की तरह भौंकते और अजीब तरह से बैठते देखा, तो वे दंग रह गए. स्थानीय लोगों की सलाह पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाई गई और उसे अस्पताल पहुंचाया गया.
कछवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. पंकज पांडेय ने बताया कि यह हाइड्रोफोबिया की स्थिति है. टीकाकरण की खुराक पूरी न होने के कारण वायरस मस्तिष्क तक पहुंच गया है. रेबीज के असर से किशोर की सांस की नली सिकुड़ने लगी है, जिसकी वजह से उसकी आवाज कुत्ते की तरह निकलने लगी है. डॉक्टर के अनुसार, अब उस किशोर को पानी से भी डर लग रहा है, जो रेबीज का सबसे खतरनाक लक्षण है.
केवल आवाज ही नहीं, बल्कि किशोर के चलने और बैठने के तरीके में भी भारी बदलाव आ गया है. वह अब इंसानों की तरह चलने के बजाय जानवरों की तरह हरकतें करने की कोशिश करता है. परिवार की एक छोटी सी अनदेखी ने उसे इस मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहां से वापसी लगभग नामुमकिन नजर आती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रेबीज के लक्षण दिखने के बाद बचने की उम्मीद न के बराबर होती है.
चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ते के काटने पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन का पूरा कोर्स करना अनिवार्य है. अक्सर लोग दो-तीन इंजेक्शन लगवाने के बाद खुद को सुरक्षित मान लेते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है. मिर्जापुर की यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि स्वास्थ्य संबंधी मामलों में लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. फिलहाल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर किशोर की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन हालात चिंताजनक हैं.