अलीगढ़: प्रेम में उठाया गया एक फैसला अब उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी बादल बाबू के लिए बड़ी मुश्किल बन गया है. दिल्ली में सिलाई का काम करने वाला यह युवक बिना पासपोर्ट और वीजा के पाकिस्तान पहुंच गया, जहां उसे अवैध प्रवेश के मामले में जेल की सजा मिली. अब सजा पूरी होने के बावजूद वह डिटेंशन सेंटर में है. परिवार का कहना है कि बादल गंभीर किडनी की बीमारी से जूझ रहा है और जल्द भारत लौटना चाहता है.
परिजनों के मुताबिक बादल बाबू दिल्ली की एक फैक्ट्री में सिलाई का काम करता था. इसी दौरान फेसबुक पर उसकी पहचान पाकिस्तान के लाहौर की रहने वाली सना रानी से हुई. दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे रिश्ता प्रेम में बदल गया. सितंबर 2024 में बादल बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के पाकिस्तान पहुंच गया, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
पाकिस्तान की अदालत ने अवैध रूप से देश में प्रवेश करने के मामले में बादल को एक वर्ष की सजा सुनाई. उसने लाहौर की कोट लखपत जेल में यह सजा पूरी की. सजा समाप्त होने के बाद भी उसकी भारत वापसी नहीं हो सकी और फिलहाल उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया है. उसकी रिहाई और वापसी की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
बादल के माता-पिता का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक बेटे के पाकिस्तान पहुंचने की जानकारी ही नहीं थी. जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संपर्क शुरू किया. परिवार के अनुसार बादल की उनसे दो बार बातचीत भी हो चुकी है. वे चाहते हैं कि भारत सरकार जल्द आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसे वापस लाए.
परिवार के अनुसार लंदन में रहने वाली पूनम नाम की महिला ने बादल की कानूनी सहायता के लिए पाकिस्तान में एक वकील से संपर्क किया और आर्थिक सहयोग भी दिया. उनका कहना है कि भारत सरकार की ओर से पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास को आवश्यक पत्र भेजे जाने के बाद ही बादल की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.
अब 21 वर्ष के हो चुके बादल के बारे में परिवार का कहना है कि वह गंभीर किडनी की बीमारी से पीड़ित है. पिता कृपाल ने बताया कि परिवार में पत्नी, तीन बेटे और एक विवाहित बेटी हैं. बादल सबसे छोटा बेटा है. परिवार ने केंद्र सरकार से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द उसकी भारत वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है.