नोएडा: उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने आज कर दिया है. इस महापरियोजना ने आसपास के गांवों के किसानों की जीवनशैली को रातों-रात बदल दिया है. करोड़ों रुपये के मुआवजे ने उन सपनों को पंख दिए हैं जो कभी नामुमकिन लगते थे. जहां पहले खेतों में हल चलते थे, वहां अब हेलीकॉप्टर की चर्चा हो रही है. भूमि अधिग्रहण ने न केवल आर्थिक संपन्नता दी है, बल्कि किसानों की सामाजिक आकांक्षाओं को भी एक नई ऊंचाई प्रदान की है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक किसान को अपनी जमीन के बदले लगभग 15 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला. इस बड़ी राशि से उसने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि एक हेलीकॉप्टर खरीदकर सबको चौंका दिया. वह अब अपने परिवार के साथ थाईलैंड में छुट्टियां बिताने की योजना बना रहा है. बनवारी बास के 26 वर्षीय शिवम प्रजापति बताते हैं कि लोग खुश हैं क्योंकि उनके बरसों पुराने अरमान अब हकीकत में बदल रहे हैं.
हवाई अड्डे के निर्माण ने रोजगार के नए द्वार भी खोले हैं. शिवम प्रजापति अब केवल मुआवजे पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे एयरपोर्ट प्रोजेक्ट और पास के सोलर प्लांट में लेबर सप्लाई करने वाले सब-कॉन्ट्रैक्टर बन गए हैं. उनकी कमाई में जबरदस्त इजाफा हुआ है. शिवम भी अपने दोस्तों के साथ थाईलैंड जाने की योजना बना रहे हैं. वे कहते हैं कि कुछ साल पहले तक विदेश यात्रा के बारे में सोचना भी उनके लिए कल्पना से परे था.
किशोरपुर गांव के अजय बेनीवाल की कहानी भी कम प्रेरक नहीं है. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाले अजय अब हर महीने 60,000 रुपये कमा रहे हैं. उन्होंने एक छोटी सी सर्विस शुरू की है, जहां मजदूर काम के दौरान अपने हेलमेट और चाबियां जमा करते हैं. अजय का कहना है कि वे पहले बहुत गरीब थे, लेकिन इस प्रोजेक्ट ने उनकी पूरी दुनिया बदल दी है. अब वे एक स्थिर आय के साथ सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं.
बनवारी बास के 56 वर्षीय नानक चंद ने भविष्य को देखते हुए अपने घर का विस्तार किया. उन्होंने प्रवासी मजदूरों को किराए पर देने के लिए छह अतिरिक्त कमरे बनवाए थे. निर्माण कार्य के चरम पर होने के दौरान उन्हें अच्छी आय हुई. हालांकि, अब मांग में काफी गिरावट आई है और उनके कमरे खाली पड़े हैं. यह दर्शाता है कि विकास के साथ-साथ आय के साधन भी समय के साथ बदलते रहते हैं और चुनौतियां बनी रहती हैं.
इस बदलाव पर इंटरनेट यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कुछ लोग हेलीकॉप्टर खरीदने को रुतबे और शक्ति का प्रतीक मान रहे हैं. वहीं, कुछ आलोचकों ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी है. उनका कहना है कि मुआवजे की राशि को विलासिता की वस्तुओं पर खर्च करना मूर्खता हो सकती है. पुणे के पास मुलशी जैसे इलाकों में लोगों ने महंगी कारें खरीदीं, लेकिन बाद में वे ईंधन के खर्च के लिए भी मोहताज हो गए थे.