नई दिल्ली: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जिले के लाखों किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है, लेकिन अब इसी योजना से जुड़े किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. फार्मर रजिस्ट्री न कराने वाले किसानों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है. प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में दो लाख 41 हजार 164 किसानों को पीएम किसान योजना का लाभ मिला है, जो अगस्त में जारी पिछली सूची से करीब 23 हजार कम है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिले में फार्मर रजिस्ट्री के मामले में रैंक 54वीं है, जबकि एक लाख 40 हजार से अधिक किसानों की रजिस्ट्री अब भी लंबित है.
फार्मर रजिस्ट्री को सरकार कृषि क्षेत्र की रीढ़ मान रही है. आने वाले समय में पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ भी फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जा सकता है. जिन किसानों की रजिस्ट्री नहीं होगी, उन्हें खाद और बीज खरीद, उद्यान विभाग की योजनाएं, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा, मिट्टी जांच और फसल परामर्श जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है. भविष्य में लागू होने वाली नई योजनाओं में भी ऐसे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.
फार्मर रजिस्ट्री होने से किसानों को बार-बार राजस्व रिकॉर्ड दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आधार नंबर के जरिए किसान का पूरा विवरण संबंधित पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा. इससे शासन के विभिन्न विभागों को किसान कल्याण योजनाएं बनाने और लागू करने में आसानी होगी. लाभार्थियों का सत्यापन, कृषि उत्पादों का विपणन, फसली ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड और आपदा के समय क्षतिपूर्ति देने में भी यह रजिस्ट्री बेहद उपयोगी साबित होगी.
पिछले दो वर्षों से फार्मर रजिस्ट्री का काम चल रहा है. इसकी जिम्मेदारी कृषि विभाग के कर्मचारियों, राजस्व लेखपालों और सीएससी संचालकों को दी गई थी. गांव-गांव शिविर भी लगाए गए, लेकिन नेटवर्क की समस्या और वेबसाइट की धीमी गति के कारण बड़ी संख्या में किसानों की रजिस्ट्री नहीं हो सकी. अभियान समाप्त होने के बाद यह काम ठंडे बस्ते में चला गया. किसानों में जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण रही.
जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पाई है, उनमें बड़ी संख्या ऐसे किसानों की है जो रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर रहते हैं. इसके अलावा जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खसरा या अन्य विवरण में गड़बड़ी होने से भी रजिस्ट्री अटक रही है. कई किसान यह समझ ही नहीं पा रहे कि फार्मर रजिस्ट्री न कराने से उन्हें कितना बड़ा नुकसान हो सकता है.
उपकृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार तिवारी के अनुसार, जिन किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है, वे नजदीकी जन सुविधा केंद्र पर जाकर आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और भूमि से जुड़े सभी अभिलेखों के साथ रजिस्ट्री करा सकते हैं. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करें, ताकि पीएम किसान सहित अन्य जरूरी सरकारी सुविधाओं से वंचित न होना पड़े. फार्मर रजिस्ट्री अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य की चाबी बन चुकी है.