लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अब परिवहन के क्षेत्र में एक और बड़ी क्रांति लाने की तैयारी में है. राज्य में अब सिर्फ सड़कों पर बसें या जमीन के नीचे मेट्रो ही नहीं, बल्कि नदियों के ऊपर 'वाटर मेट्रो' सरपट दौड़ती नजर आएगी. परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इसके स्पष्ट संकेत दे दिए हैं, जिससे प्रदेश में जल परिवहन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. इस विस्तार से लोगों में खुशी की लहर देखी जा सकती है. कई लोग इसे योगी सरकार का मास्टरस्ट्रोक भी कह रहे हैं.
शुक्रवार को परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और कोच्चि मेट्रो के निदेशक संजय कुमार के बीच एक अहम बैठक हुई. इस बैठक का मुख्य केंद्र लखनऊ की गोमती नदी रही. गोमती में वाटर मेट्रो के संचालन को लेकर 'तकनीकी व्यवहारिकता अध्ययन रिपोर्ट' पर विस्तार से चर्चा की गई. सरकार का लक्ष्य है कि लखनऊ में नावों के पारंपरिक सफर को आधुनिक तकनीक से लैस 'वाटर मेट्रो' में बदला जाए.
सरकार की योजना केवल राजधानी तक सीमित नहीं है. गोमती में सफलता के बाद यूपी के अन्य प्रमुख जल निकायों को भी इससे जोड़ा जाएगाः
लखनऊ: गोमती नदी की लहरों पर मेट्रो का अनुभव.
मथुरा-आगरा: यमुना नदी के जरिए इन दो ऐतिहासिक शहरों के बीच जल परिवहन.
गोरखपुर: रामगढ़ ताल में पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधा.
बलिया: सुरहा ताल में वाटर मेट्रो का संचालन.
वाराणसी/प्रयागराज: गंगा नदी में भी कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना.
वाटर मेट्रो न केवल यातायात के दबाव को कम करेगी, बल्कि यूपी के पर्यटन क्षेत्र के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी. तकनीक से लैस ये मेट्रो पर्यावरण के अनुकूल होंगी और पर्यटकों को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्रदान करेंगी. परिवहन मंत्री के अनुसार, कोच्चि मेट्रो की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए जल्द ही इसका डीपीआर (DPR) तैयार कर काम शुरू किया जाएगा.
ये हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक मेट्रो जहाज शोर और प्रदूषण मुक्त होंगे, जो पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए यात्रियों को लग्जरी अनुभव देंगे. इससे किनारों पर बसे व्यापारिक केंद्रों को नई संजीवनी मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए गाइड से लेकर मेंटेनेंस तक के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे.