लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 69,794 स्मार्टफोन वितरित किए. इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को 1,33,282 स्टैडियोमीटर, 10,553 इंफैंटोमीटर और 58,237 वजन मापने वाली मशीनें भी दी गईं. सरकार का उद्देश्य सेवा वितरण को मजबूत करना और रियल टाइम डेटा कलेक्शन को बेहतर बनाना है.
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि पिछले चार वर्षों से वे लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहे थे कि हर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पास स्मार्टफोन हो. उन्होंने कहा कि समय पर डेटा अपलोड न होने के कारण राज्य की रैंकिंग प्रभावित होती थी, इसलिए यह जरूरी था कि कार्यकर्ताओं को डिजिटल उपकरण दिए जाएं और उन्हें इनके उपयोग में दक्ष बनाया जाए.
बच्चा सुपोषित और माँ स्वस्थ होगी तो 'साक्षर भारत-सशक्त भारत' बनने से कोई नहीं रोक सकता।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 30, 2026
सुपोषित, साक्षर, सशक्त भारत की निर्माण यात्रा को गति देते हुए आज लखनऊ में 69,804 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों/मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन एवं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को 2 लाख से अधिक ग्रोथ… pic.twitter.com/JRc8EwKqrk
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है, इसलिए सरकार उन्हें आधुनिक संसाधनों और सुविधाओं से लैस कर रही है. उनका मानना है कि इससे कार्यकर्ताओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी और सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचेंगी.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले पोषण सामग्री वितरण का ठेका उत्तर भारत के एक शराब माफिया को दिया गया था, जिसके कारण कई क्षेत्रों में पोषण सामग्री सही तरीके से नहीं पहुंच पाती थी. उन्होंने कहा कि उस समय भोजन की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि वह खाने योग्य भी नहीं था.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ईमानदारी से की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय को सम्मानजनक बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रही है. उनका कहना था कि अगर आंगनवाड़ी केंद्र स्मार्ट हो रहे हैं, तो कार्यकर्ताओं का मानदेय भी 'स्मार्ट' होना चाहिए.
उन्होंने यह भी घोषणा की कि अप्रैल से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक नई कॉर्पोरेशन बनाई जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पहले कई आउटसोर्स एजेंसियां नेताओं और माफिया से जुड़ी थीं, जो कर्मचारियों के वेतन में कटौती करती थीं.
उन्होंने कहा कि पहले सरकार द्वारा दिए जाने वाले 10-12 हजार रुपये में से कर्मचारियों को केवल 5-6 हजार रुपये ही मिलते थे और बाकी राशि बिचौलिए रख लेते थे. अब सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कर्मचारियों को उनका पूरा भुगतान सीधे मिले.
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय में भी उन्होंने घर-घर जाकर सेवाएं दीं और बच्चों की देखभाल में अहम भूमिका निभाई. सरकार उनके सम्मान और विकास के लिए प्रतिबद्ध है.