आगरा के एक गांव में बुधवार को ऐसा प्रशासनिक अभियान चला, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में होती रही. करीब छह दशक से विवादों और कब्जों में घिरी तालाब की भूमि को आखिरकार प्रशासन ने खाली करा लिया. कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई में धार्मिक स्थलों समेत कई अवैध निर्माण हटाए गए. प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चले और पूरे अभियान को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया गया. अधिकारियों का कहना है कि आगे इस भूमि का संरक्षण और विकास किया जाएगा.
प्रशासन के अनुसार गांव के तालाब की 22 बीघा से अधिक भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जे बने हुए थे. बीते कई दशकों में यहां विभिन्न प्रकार के निर्माण खड़े हो गए थे. राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाब की जमीन का वास्तविक स्वरूप खत्म होता जा रहा था. इसी मामले को लेकर शिकायतें लगातार उठती रहीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया. आखिरकार मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक पहुंचा, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ.
ग्रामीण भूरी सिंह ने तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की थी. स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद उन्होंने पिछले वर्ष राष्ट्रीय हरित अधिकरण में अपील दायर की. मामले की सुनवाई के बाद जनवरी में अधिकरण ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद राजस्व और प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ी तथा नौ जून को तहसील न्यायालय ने संबंधित भूमि को खाली कराने के आदेश जारी किए थे.
बुधवार सुबह प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भारी सुरक्षा बल के साथ मौके पर पहुंचे. ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर रखा गया और संवेदनशीलता को देखते हुए मकानों की छतों पर पीएसी के जवान तैनात किए गए. गांव की गलियों में लगातार पुलिस गश्त करती रही. अधिकारियों ने पूरे अभियान की निगरानी की ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो. सुरक्षा व्यवस्था के कारण कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ती रही.
प्रशासन ने बताया कि दोपहर तक अवैध मस्जिद, मजार, मंदिर और अन्य शेष निर्माणों को हटा दिया गया. अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान किसी प्रकार का विवाद या तनाव सामने नहीं आया. जिला प्रशासन का कहना है कि कब्जा मुक्त कराई गई भूमि पर अब तालाब को उसके मूल स्वरूप में विकसित करने की योजना बनाई जाएगी. आने वाले समय में यहां सुंदरीकरण और संरक्षण से जुड़े कार्य शुरू किए जाएंगे ताकि जल स्रोत का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके.