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नाहरपुरा से नांदला तक तेजा दशमी पर तेजाजी मंदिरों में उमड़ी भीड़, भक्तों ने बंधवाई तांती

तेजा दशमी पर नाहरपुरा, नांदला और पुरानी राजोसी गांवों में लोकदेवता तेजाजी महाराज के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. भक्तों ने पूजा-अर्चना कर तांती बंधवाई और खीर-चूरमा का भोग लगाया.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
नाहरपुरा से नांदला तक तेजा दशमी पर तेजाजी मंदिरों में उमड़ी भीड़, भक्तों ने बंधवाई तांती
Courtesy: Pinterest

तेजा दशमी के अवसर पर राजस्थान के नाहरपुरा, नांदला और पुरानी राजोसी गांवों में लोकदेवता तेजाजी महाराज के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. सुबह से ही मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था. श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की और तांती बंधवाई.

नाहरपुरा स्थित तेजाजी मंदिर में तेजा दशमी पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए. भोपा मांगीलाल और पुजारी जीवराज ने श्रद्धालुओं को तांती बांधी. मंदिर में आने वाले भक्तों ने तेजाजी महाराज के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. मंदिर की व्यवस्थाओं में सेवक गंगाराम, गिरधारी और गोरधन लाल गुर्जर ने सहयोग किया. सुबह से लेकर दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही.

खीर-चूरमा का लगाया भोग

तेजाजी धाम पर भक्तों ने खीर और चूरमा का भोग लगाया. श्रद्धालुओं ने लोकदेवता तेजाजी महाराज से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की. इस दौरान गौ भक्त भारू, रामकरण, सहदेव, श्रवण, जसराज, अर्जुन, संग्राम, श्रीकिशन और सत्यनारायण समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मौजूद रहे.

नांदला में भी हुए धार्मिक आयोजन

तेजा दशमी के मौके पर नांदला गांव में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए. श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रसाद चढ़ाया. इसके बाद भक्तों ने तांती बंधवाई और लोकदेवता का आशीर्वाद लिया.

पुरानी राजोसी से भी पहुंचे श्रद्धालु

पुरानी राजोसी गांव से भी बड़ी संख्या में लोग तेजाजी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे. भागचंद, फिरोज खान, देवी सिंह, सल्ला सिंह, सीताराम, महेंद्र, पावणा और हरलाल सिंह सहित कई श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा की. तेजा दशमी के अवसर पर तीनों गांवों में दिनभर धार्मिक और भक्तिमय माहौल बना रहा. मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, प्रसाद और तांती बांधने की परंपरा निभाई.