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शादी का फैसला सिर्फ आपका, परिवार नहीं बना सकता दबाव: हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शादी करना, न करना या जीवनसाथी चुनना पूरी तरह व्यक्तिगत अधिकार है. किसी भी बालिग व्यक्ति पर परिवार या रिश्तेदार अपनी इच्छा नहीं थोप सकते.

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Edited By: Sagar Bhardwaj
शादी का फैसला सिर्फ आपका, परिवार नहीं बना सकता दबाव: हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
Courtesy: pinterest

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि विवाह से जुड़े निर्णय किसी भी व्यक्ति के जीवन के सबसे निजी और महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल होते हैं. ऐसे मामलों में किसी प्रकार का पारिवारिक दबाव या जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जा सकती. यह टिप्पणी मोहाली की एक युवती की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें उसने परिवार की ओर से शादी के लिए दबाव बनाए जाने और धमकियां मिलने का आरोप लगाया था.

 करियर पर ध्यान देने की चाह बनी विवाद की वजह

मामले के अनुसार, मोहाली की रहने वाली एक एमबीए पास युवती अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए परिवार से अलग रह रही थी. युवती ने अदालत को बताया कि उसके माता-पिता और कुछ रिश्तेदार लगातार उस पर अपनी पसंद के युवक से विवाह करने का दबाव बना रहे थे. जब उसने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार किया तो उसे घर बुलाकर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं. युवती ने पहले पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई न होने पर उसे न्यायालय का रुख करना पड़ा.

 अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बताया सर्वोपरि

सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लेख करते हुए कहा कि हर बालिग नागरिक को गरिमा, स्वतंत्रता, निजता और स्वायत्तता का अधिकार प्राप्त है. अदालत ने कहा कि विवाह करना है या नहीं, और यदि करना है तो किससे करना है, यह पूरी तरह व्यक्ति का निजी निर्णय है. इस अधिकार में किसी भी प्रकार की बाहरी दखलंदाजी स्वीकार नहीं की जा सकती. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पारिवारिक दबाव या भावनात्मक ब्लैकमेल को वैध नहीं माना जा सकता.

 राज्य और पुलिस की जिम्मेदारी पर भी जोर

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य और पुलिस प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित है, तो प्रशासन को उसकी शिकायत को गंभीरता से लेना चाहिए. ऐसे मामलों में देरी या लापरवाही व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि व्यक्तिगत विकल्पों की सुरक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना से जुड़ी हुई है.

एसएसपी को दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मोहाली के एसएसपी को तुरंत संज्ञान लेने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि सबसे पहले युवती की सुरक्षा और उसे संभावित खतरे का आकलन किया जाए. यदि उसकी जान, स्वतंत्रता या सुरक्षा को कोई वास्तविक खतरा दिखाई देता है, तो उसे तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए. इस फैसले को व्यक्तिगत अधिकारों और महिलाओं की स्वतंत्र पसंद के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश माना जा रहा है.