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नशा छोड़ा, जिंदगी संवारी! अमृतसर के इस सेंटर ने 20 हजार से ज्यादा लोगों को दी नई शुरुआत

अमृतसर के द हर्मिटेज रिहैब सेंटर में 2008 से नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों का उपचार और पुनर्वास किया जा रहा है. केंद्र के अनुसार, अब तक 20 हजार से अधिक लोगों का इलाज हुआ.

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नशा छोड़ा, जिंदगी संवारी! अमृतसर के इस सेंटर ने 20 हजार से ज्यादा लोगों को दी नई शुरुआत
Courtesy: AI Generated

अमृतसर: नशे की लत से बाहर निकलने की राह आसान नहीं होती, लेकिन सही उपचार, परिवार के सहयोग और लगातार देखभाल से बदलाव संभव है. अमृतसर के मजीठा-वेरका बाईपास स्थित द हर्मिटेज रिहैब सेंटर में करीब 18 वर्षों से नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास का काम चल रहा है. यहां पुरुषों के साथ महिलाओं का भी उपचार किया जाता है. केंद्र के अनुसार, अब तक 20 हजार से ज्यादा लोगों का उपचार हो चुका है और करीब 65 मरीज फिलहाल भर्ती हैं.

द हर्मिटेज रिहैब सेंटर की स्थापना वर्ष 2008 में डॉ. जेपीएस भाटिया के नेतृत्व में हुई थी. केंद्र में शराब, हेरोइन और अन्य मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे लोगों के लिए मेडिकल डिटाक्स, इनडोर और आउटडोर उपचार, काउंसलिंग तथा पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है.

उपचार केवल नशा छुड़ाने तक सीमित नहीं

डॉ. भाटिया के अनुसार, उपचार का पहला चरण शरीर से नशे के प्रभाव को कम करना है. इसके बाद मरीज की मानसिक स्थिति, व्यवहार और नशे की ओर लौटने वाले कारणों पर काम किया जाता है. काउंसलिंग, आर्ट थेरेपी और दूसरी गतिविधियों के जरिए मरीजों को तनाव संभालने तथा रोजमर्रा की जिंदगी को व्यवस्थित करने में मदद दी जाती है.

दिनचर्या के जरिए सामान्य जीवन की ओर वापसी

पुनर्वास प्रक्रिया में मरीज की दैनिक दिनचर्या को भी अहम माना जाता है. समय पर उठना, चिकित्सकीय सलाह, काउंसलिंग, समूह गतिविधियां, मनोरंजन और रचनात्मक काम उपचार का हिस्सा बनाए जाते हैं. इसका उद्देश्य मरीज को धीरे-धीरे सामान्य जीवन की लय में लौटाना है, ताकि उपचार के बाद वह परिवार और समाज के बीच आत्मविश्वास के साथ अपनी जिंदगी आगे बढ़ा सके.

परिवार की भूमिका भी अहम

नशे की समस्या का असर केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार भी इससे प्रभावित होता है. इसलिए केंद्र में परिजनों की काउंसलिंग पर भी जोर दिया जाता है. परिवारों को समझाया जाता है कि मरीज को शर्मिंदा करना या उससे दूरी बनाना समाधान नहीं है. इसके बजाय भरोसा, निगरानी और भावनात्मक सहयोग जरूरी है. उपचार के बाद फॉलोअप के जरिए भी मरीज की स्थिति पर नजर रखने की कोशिश की जाती है.

स्वस्थ हुए लोग बन रहे दूसरों की ताकत

केंद्र के अनुसार, उपचार के बाद सामान्य जीवन में लौटे कई लोग आज परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं. इनमें से कुछ लोग केंद्र से जुड़े रहते हैं और नए मरीजों से अपने अनुभव साझा करते हैं. उनका उद्देश्य इलाज करा रहे लोगों को यह भरोसा देना है कि नशे की समस्या से बाहर निकलकर दोबारा सामान्य और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत की जा सकती है.