पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और सक्रिय बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है. पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल की मंजूरी के बाद तीनों कार्यकारी प्रधानों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.
नई व्यवस्था के तहत उन्हें सह प्रभारियों के साथ समन्वय, विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और जिला स्तर पर गतिविधियों की निगरानी का दायित्व दिया गया है. पार्टी का लक्ष्य चुनाव से पहले संगठन को ज्यादा प्रभावी और सक्रिय बनाना है.
नई व्यवस्था के तहत कार्यकारी प्रधान सुखविंदर सिंह डैनी को सह प्रभारी सूरज ठाकुर के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है. वह विधानसभा क्षेत्रों में सचिवों के साथ तालमेल बनाकर काम करेंगे. साथ ही उन्हें 42 जिलों की संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी का दायित्व भी सौंपा गया है.
कार्यकारी प्रधान संगत सिंह को सह प्रभारी रविंद्र दलवी के साथ जोड़ा गया है. उन्हें 45 जिलों में संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस व्यवस्था से जिलों में बेहतर समन्वय बनेगा और चुनावी तैयारियों को गति मिलेगी.
कार्यकारी प्रधान राज कुमार वेरका को सह प्रभारी हीना कवाडे के साथ विधानसभा क्षेत्रों में समन्वय का कार्य दिया गया है. इसके अलावा वे 30 जिलों की गतिविधियों की भी निगरानी करेंगे. नई जिम्मेदारी के तहत उन्हें स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल मजबूत करने की जिम्मेदारी मिली है.
पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल इन दिनों चंडीगढ़ में पांच दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान वह नेताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. इन बैठकों में चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है.
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. इसी सोच के तहत जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया गया है, ताकि हर स्तर पर जवाबदेही तय हो और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की तैयारियां अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकें.