पंजाब: पिछले साल रावी नदी में आई भयंकर बाढ़ की याद अभी भी लोगों के मन में ताजा है. उस तबाही को दोहराने से रोकने के लिए जल संसाधन विभाग ने रावी नदी में बड़े पैमाने पर डी-सिल्टिंग का काम तेज कर दिया है. धर्मकोट घोनेवाल कॉम्प्लेक्स में चल रहे इस अभियान का मकसद नदी की जल वहन क्षमता बढ़ाना और सीमावर्ती गांवों को बाढ़ से बचाना है.
पिछले वर्ष मानसून के दौरान रावी नदी ने भारी तबाही मचाई थी. अमृतसर जिले में 23 जगहों पर तटबंध टूट गए थे. इससे जिले के 198 गांवों पर पानी का कहर टूटा. बाढ़ में 10 लोगों की जान चली गई, जबकि 307 पशुओं की मौत हो गई. करीब 59,793 एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई. केवल धर्मकोट घोनेवाल कॉम्प्लेक्स में ही तटबंध छह जगहों पर टूटा था.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 और 2025 में सतलुज, ब्यास और रावी नदी प्रणाली में आई बाढ़ से 86 हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि प्रभावित हुई. कुल नुकसान करीब 1,825 करोड़ रुपये का हुआ. नदी में जमा गाद के कारण जल वहन क्षमता काफी कम हो गई थी, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया था.
जल संसाधन विभाग अब इस समस्या को जड़ से हल करने में लगा है. नदी से गाद हटाने का काम बड़े स्तर पर चल रहा है. गाद को हटाकर उसे सुरक्षित जगहों पर जमा किया जा रहा है, ताकि नदी का रास्ता साफ हो सके और पानी आसानी से बह सके. विभाग ने डिजिटल निगरानी की व्यवस्था भी की है. आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर पूरे अभियान पर नजर रखी जा रही है. इससे काम की गुणवत्ता बनी रहेगी और समय पर पूरा किया जा सकेगा.अधिकारियों का कहना है कि मानसून से पहले जितना ज्यादा गाद हटाया जाएगा, बाढ़ का खतरा उतना ही कम होगा.
पंजाब सरकार का लक्ष्य है कि सीमावर्ती जिलों अमृतसर और गुरदासपुर को बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए. डी-सिल्टिंग के साथ-साथ तटबंधों की मरम्मत और मजबूती का काम भी साथ-साथ चल रहा है. स्थानीय लोगों ने इस अभियान का स्वागत किया है.