रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के लिए नई जिंदगी का माध्यम भी है. सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति से लेकर थैलेसीमिया, कैंसर और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तक, समय पर मिला रक्त अनगिनत जीवन बचाता है. विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ ने इस दिशा में एक उल्लेखनीय पहचान बनाई है. शहर में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं और जरूरतमंदों की उम्मीद बन रहे हैं..
रक्तदान में बना अग्रणी शहर
चंडीगढ़ आज उत्तर भारत के प्रमुख रक्तदान केंद्रों में गिना जाता है. पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 जैसे संस्थान पूरे वर्ष सामाजिक संगठनों के सहयोग से रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं. इन प्रयासों के कारण हर साल 1.50 लाख से अधिक यूनिट रक्त एकत्रित किया जा रहा है..
संस्थानों की अहम भूमिका
पीजीआई के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के अनुसार संस्थान अकेले 70 से 80 हजार यूनिट रक्त एकत्रित करता है. वहीं जीएमसीएच-32 भी हर वर्ष 25 से 30 हजार यूनिट रक्त संग्रह करता है. विभिन्न संस्थाएं मिलकर इस अभियान को लगातार मजबूत बना रही हैं.
थैलेसीमिया मरीजों को सहारा
अस्पतालों की टीमें नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित कर रही हैं. विशेष रूप से थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए स्थायी डोनर समूह तैयार किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके
भ्रांतियों को तोड़ रहा अभियान
विशेषज्ञों का कहना है कि रक्तदान से स्थायी कमजोरी नहीं आती और शरीर जल्द ही रक्त की कमी पूरी कर लेता है. सुरक्षित प्रक्रिया और जागरूकता अभियानों ने लोगों का विश्वास बढ़ाया है, जिससे रक्तदान आंदोलन लगातार मजबूत हो रहा है.