देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए पंजाब के लांसनायक सुखप्रीत सिंह को शुक्रवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास ड्यूटी के दौरान भूस्खलन में उनकी जान चली गई. गांव से लेकर शहर तक हर आंख नम दिखी. अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की और देशभक्ति के नारों से माहौल गूंज उठा.
शहीद सुखप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर सबसे पहले गिद्दड़बाहा के हुसनार चौक लाया गया. यहां बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और अमर रहे के नारे लगाए. सेना की टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी. इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव बुट्टर बखूहा ले जाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.
परिजनों के अनुसार मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात वह राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम चौकी पर ड्यूटी कर रहे थे. लगातार बारिश के बीच अचानक भूस्खलन हुआ और पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थर उनके सिर पर आ गिरे. इस हादसे में उन्होंने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया.
कनाडा से पहुंचीं उनकी बहन कमलप्रीत कौर हैप्पी ने अंतिम दर्शन के दौरान अपने इकलौते भाई को सेहरा बांधा और भावुक होकर गीत गाते हुए विदाई दी. यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया. अंतिम संस्कार की रस्म शहीद के चचेरे भाई और सैनिक मनदीप सिंह बब्बू ने पूरी की.
परिवार ने बताया कि सुखप्रीत सिंह ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना में भर्ती होने का लक्ष्य बनाया था. लगातार मेहनत के बाद साल 2019 में उनका चयन हुआ. प्रशिक्षण के लिए उन्हें जबलपुर भेजा गया. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दीं और इसी साल मार्च में उनकी तैनाती नियंत्रण रेखा पर हुई.
करीब तीन महीने पहले सुखप्रीत सिंह छुट्टी पर अपने गांव आए थे. परिवार उनकी नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियों में जुटा था. पास के गांव थराजवाला की युवती के साथ उनका विवाह तय हुआ था. जिस घर में कुछ महीनों बाद शहनाई गूंजने वाली थी, वहां अब उनके बलिदान के बाद गहरा सन्नाटा और शोक का माहौल है.