फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और मोहाली की चितकारा यूनिवर्सिटी से जुड़े हालिया विवादों के बीच कैंपस में हुई हिंसक घटनाओं ने विश्वविद्यालयों के माहौल के साथ विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
इन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले उन छात्रों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है जो अभी अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रहे हों. क्योंकि आने वाले महीनों में कैंपस प्लेसमेंट का दौर शुरू होना है.
किसी भी यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों के लिए नवंबर और दिसंबर का समय करियर के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. इसी अवधि में देश और विदेश की कई बड़ी कंपनियां विश्वविद्यालयों में पहुंचकर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन करती हैं. इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और दूसरे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के छात्रों को इस दौरान आकर्षक वेतन पैकेज हासिल करने का मौका मिलता है. कुछ निजी कंपनियां कैंपस भर्ती में दो करोड़ रुपये तक के सालाना पैकेज भी ऑफर करती हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय के माहौल में किसी तरह की अस्थिरता या हिंसा की खबरें सामने आने पर छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है.
कैंपस प्लेसमेंट के दौरान कंपनियों की नजर केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक योग्यता पर नहीं होती. संस्थान का अनुशासन, सुरक्षा व्यवस्था, अकादमिक वातावरण और कैंपस की स्थिरता भी महत्वपूर्ण पहलू माने जाते हैं. लंबे समय तक खराब माहौल रहने पर विश्वविद्यालय की कॉर्पोरेट छवि प्रभावित हो सकती है और कंपनियां वहां भर्ती गतिविधियों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत सकती हैं.
पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर के मुताबिक, किसी निजी विश्वविद्यालय में हिंसक घटनाओं या लगातार तनावपूर्ण स्थिति का असर अकादमिक गतिविधियों के साथ प्लेसमेंट पर भी पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों में कक्षाओं, उपस्थिति, आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था एक तय प्रक्रिया के तहत चलती है. इस व्यवस्था में व्यवधान का प्रभाव छात्रों के प्रदर्शन और प्लेसमेंट दोनों पर पड़ सकता है.