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चंडीगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा बेवजह सोलर प्लांट का मासिक शुल्क

चंडीगढ़ प्रशासन सरकारी कर्मचारियों को सोलर पावर प्लांट के अनिवार्य मासिक शुल्क से राहत देने की तैयारी कर रहा है. नई व्यवस्था के तहत सोलर बिजली का उपयोग नहीं करने वाले कर्मचारियों को 900 रुपये का मासिक शुल्क नहीं देना होगा.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
चंडीगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा बेवजह सोलर प्लांट का मासिक शुल्क
Courtesy: Pinterest

चंडीगढ़: चंडीगढ़ प्रशासन सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री सूर्य योजना के तहत सरकारी मकानों की छतों पर लगाए गए सोलर पावर प्लांट के मासिक शुल्क को लेकर नया प्रस्ताव तैयार किया गया है. इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद जो कर्मचारी सोलर बिजली का उपयोग नहीं करना चाहेंगे, उन्हें हर महीने अनिवार्य रूप से 900 रुपये का शुल्क नहीं देना पड़ेगा.

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार तीन किलोवाट क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट के लिए कर्मचारियों से प्रति किलोवाट 300 रुपये यानी कुल 900 रुपये प्रतिमाह वसूले जाते हैं. छह किलोवाट क्षमता वाले प्लांट वाले बड़े सरकारी मकानों के लिए यह शुल्क 1800 रुपये प्रतिमाह है. कई कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि वे सोलर प्लांट से बनने वाली पूरी बिजली का उपयोग नहीं कर पाते, लेकिन उन्हें हर महीने तय शुल्क देना पड़ता है.

क्या है नई व्यवस्था?

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई कर्मचारी सोलर ऊर्जा का उपयोग नहीं करना चाहता है तो उससे सोलर प्लांट का मासिक शुल्क नहीं लिया जाएगा. ऐसे कर्मचारी केवल अपने घर में उपयोग की गई सामान्य बिजली की वास्तविक खपत के अनुसार ही बिजली बिल का भुगतान करेंगे. वहीं सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली सीधे ग्रिड में जाएगी और उससे होने वाला राजस्व प्रशासन को मिलेगा.

जो कर्मचारी सोलर बिजली का उपयोग जारी रखना चाहेंगे, उनसे पहले की तरह निर्धारित मासिक शुल्क लिया जाएगा. प्रशासन की मंजूरी मिलने के बाद इस नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार अगले महीने इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है.

कौन देगा पूरा खर्च?

सरकारी मकानों पर सोलर प्लांट लगाने का पूरा खर्च प्रशासन वहन कर रहा है. इसके विपरीत निजी मकानों पर सोलर प्लांट लगाने का खर्च संबंधित मकान मालिक को उठाना पड़ता है. पिछले छह महीनों से चंडीगढ़ में बिजली का बिल हर महीने जारी किया जा रहा है, जबकि पहले दो महीने में एक बार बिल आता था.

कुछ कर्मचारियों ने यह भी मांग की है कि उनकी जरूरत से अधिक बनने वाली सोलर बिजली का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए और अतिरिक्त बिजली को उनके अगले बिजली बिल में समायोजित किया जाना चाहिए. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सोलर प्लांट का उपयोग न करने वाले कर्मचारियों से जबरन शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए.

क्या रखा गया है लक्ष्य?

चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2030 तक शहर को देश का पहला कार्बन मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी दिशा में अब तक शहर के 6200 सरकारी मकानों में से 5400 मकानों पर सोलर पावर प्लांट लगाए जा चुके हैं. करीब 818 मकानों पर पेड़ों की बाधा या अन्य तकनीकी कारणों से सोलर प्लांट नहीं लगाए जा सके हैं. सोलर रूफटॉप लगाने के लिए न्यूनतम दो किलोवाट का स्वीकृत बिजली लोड होना आवश्यक है.