मुंबई में रविवार को महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा नजारा देखने को मिला. शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे लंबे समय बाद एक ही मंच पर दिखाई दिए. दोनों नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व किया. इस मार्च में कांग्रेस और शरद पवार गुट वाली NCP के नेता भी शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग की.
यह प्रदर्शन दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा इलाके से शुरू हुआ. प्रदर्शनकारियों को बृहन्मुंबई नगर निगम यानी BMC मुख्यालय की ओर मार्च करना था. इस प्रदर्शन को 'विराट गर्जना मोर्चा' नाम दिया गया. आयोजकों की ओर से समर्थकों से कहा गया था कि वे मार्च में पार्टी के झंडों के बजाय केवल राष्ट्रीय तिरंगा लेकर शामिल हों. इसका उद्देश्य प्रदर्शन को किसी एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम के बजाय व्यापक राजनीतिक विरोध के रूप में दिखाना था.
#WATCH | Mumbai: Supporters of MNS chief Raj Thackeray and Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray gather in large numbers near Metro Cinema.
— ANI (@ANI) October 4, 2026
Both are leading a joint protest march toward the BMC headquarters against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar. pic.twitter.com/BZnmhmSkgK
प्रदर्शन का सबसे बड़ा मुद्दा मतदाता सूची की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया रही. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं. उनका कहना है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है. हालांकि, मतदाता सूची में संशोधन और नामों की जांच चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी भी दावे को आंकड़ों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही अंतिम रूप से देखा जा सकता है.
UddhavSaheb Thackeray #LIVE | गर्जना मोर्चा | लोकशाही आणि संविधान वाचवण्यासाठी | मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय, मुंबई https://t.co/1BbLsl0kxt
— Office of Uddhav Thackeray (@OfficeofUT) October 4, 2026
राज ठाकरे ने प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए कहा कि लोगों के वोट के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. उन्होंने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की. राज ठाकरे ने यह भी कहा कि भविष्य में चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए.
उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम जुड़े और अब SIR के जरिए बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. राज ठाकरे ने विपक्षी दलों से दिल्ली जाकर इस मुद्दे को उठाने की अपील भी की.
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ा. उन्होंने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का भी उल्लेख किया.
उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका विरोध केवल किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि चुनाव प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान अधिकार से जुड़े सवालों को लेकर है. उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था की तुलना तानाशाही से की.
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहा है.
राउत ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में जवाब मांगने की बात कही.
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ सड़क पर उतरने को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. दोनों नेताओं ने पहले भी अलग-अलग राजनीतिक रास्ते अपनाए हैं, लेकिन इस प्रदर्शन में दोनों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे पर एक साथ आवाज उठाई.
मार्च के आयोजकों ने कांग्रेस और NCP सहित अन्य विपक्षी दलों को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया था. ऐसे में यह प्रदर्शन केवल ठाकरे गुटों का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि विपक्षी दलों के साझा विरोध के रूप में सामने आया.