IIT बॉम्बे में छात्रों की पढ़ाई के साथ उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी कई बदलावों की तैयारी चल रही है. संस्थान की योजना में हॉस्टल व्यवस्था को बेहतर बनाने से लेकर छात्रों के लिए वेलनेस सपोर्ट मजबूत करने तक कई पहल शामिल हैं. इनमें नया वेलनेस पद, हॉस्टल स्तर पर संपर्क व्यवस्था, मेस सिस्टम में बदलाव और मनोरंजन व शारीरिक गतिविधियों के लिए बेहतर जगह तैयार करना शामिल है.
इन बदलावों के पीछे छात्र कल्याण को कैंपस व्यवस्था के केंद्र में रखने की कोशिश नजर आती है. साहिल वाकोडे की मौत के बाद IIT बॉम्बे में मेंटल हेल्थ और स्टूडेंट वेलनेस को लेकर कई कदमों पर काम हो रहा है. हालांकि, सभी योजनाएं एक साथ लागू नहीं की जा रही हैं. कुछ पर काम शुरू हो चुका है, जबकि कुछ प्रस्ताव अभी मंजूरी, छात्रों की राय और अंतिम निर्णय के चरण में हैं.
IIT बॉम्बे ने Associate Dean (Student Wellness) का नया पद शुरू किया है. संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रो. दीपक मारला को इस पद पर सूचीबद्ध किया गया है. उनकी जिम्मेदारी छात्र कल्याण से जुड़े मामलों और वेलनेस सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने से जुड़ी होगी. इसके अलावा हॉस्टल स्तर पर Student Wellness Secretaries नियुक्त करने की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है. इसका उद्देश्य छात्रों को अपने हॉस्टल में ही वेलनेस संबंधी समस्याओं के लिए एक नजदीकी संपर्क उपलब्ध कराना है.
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के साथ पढ़ाई के दबाव को लेकर भी संस्थान विचार कर रहा है. इसी कड़ी में सेमेस्टर के अंत में होने वाली परीक्षाओं के शेड्यूल की समीक्षा की जा रही है. IIT बॉम्बे ने एक वैकल्पिक परीक्षा टाइमलाइन पर काम शुरू किया है. हालांकि, यह बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है. इसलिए फिलहाल छात्रों के लिए परीक्षा का कोई नया शेड्यूल तय नहीं माना जा सकता.
हॉस्टल की मेस व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है. संस्थान छात्रों के बीच मेस सर्वे पूरा कर चुका है और उसके परिणामों के आधार पर नई व्यवस्था तैयार की जाएगी. संशोधित फ्लेक्सी-मेस मॉडल तैयार है. अब दोबारा टेंडर और कैटरर्स की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इसके साथ हॉस्टल में प्ले एरिया बनाने की योजना भी है. जगह तय करने में छात्र प्रतिनिधियों, स्पोर्ट्स काउंसलर्स और वार्डन्स की राय ली जाएगी.
हॉस्टल में लगे पंखों को बदलने के विकल्पों पर भी संस्थान काम कर रहा है. परीक्षण और निर्माताओं के साथ बातचीत के बाद कुछ विकल्प सामने आए हैं. हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. पंखों को बदलने को लेकर छात्रों से फीडबैक लिया जाएगा और सर्वे के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी. यानी इस बदलाव में भी छात्रों की राय को अहम भूमिका दी जा रही है.