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India Daily

फिर फूटा महंगाई का बम, 1 अक्टूबर से बढ़े CNG के दाम; जानें नई कीमत

मुंबई महानगर क्षेत्र में 1 अक्टूबर से सीएनजी 1 रुपये प्रति किलो महंगी होकर 89 रुपए हो गई है. महानगर गैस लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गैस की बढ़ती कीमतों को वजह बताया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
फिर फूटा महंगाई का बम, 1 अक्टूबर से बढ़े CNG के दाम; जानें नई कीमत
Courtesy: pinterest

मुंबई और पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में वाहन चालकों को 1 अक्टूबर से सीएनजी के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी होगी. महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने खुदरा सीएनजी की दरों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की घोषणा की है. इस नए संशोधन के बाद मुंबई में सीएनजी की कीमत 88 से बढ़कर 89 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है. यह नई दर 30 सितंबर की आधी रात से लागू हो चुकी है.

क्यों महंगी हुई CNG?

MGL के अनुसार, इनपुट गैस की लागत बढ़ने के कारण यह फैसला लिया गया है. कंपनी ने बताया कि घरेलू प्राकृतिक गैस और आयातित री-गैसीफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) दोनों की कीमतें बढ़ी हैं. अतिरिक्त सीएनजी मांग की पूर्ति स्पॉट आरएनजी से की जा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ी है. पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में गैस के दाम बढ़े हैं, जिससे कंपनी की खरीद लागत में इजाफा हुआ है.

कौन-कौन से वाहन चालक होंगे प्रभावित?

कीमतों में हुए इस इजाफे का सीधा असर एमजीएल के सीएनजी नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले लाखों वाहनों पर पड़ेगा. इनमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, निजी कारें, बसें और अन्य व्यावसायिक वाहन शामिल हैं. व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए ईंधन का दैनिक खर्च बढ़ेगा, जिसका असर आने वाले दिनों में आम यात्रियों के किराए पर भी देखा जा सकता है.

2026 में तीसरी बार बढ़ीं सीएनजी की दरें

साल 2026 में सीएनजी की कीमतों में यह तीसरी बढ़ोतरी है. इससे पहले सितंबर में कीमतें 2 रुपये बढ़ाकर 88  रुपए प्रति किलो की गई थीं, जबकि मई में दाम बढ़ाकर 86 रुपए प्रति किलो किए गए थे. उस समय कंपनी ने घरेलू गैस आवंटन में कमी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई गिरावट को मुख्य वजह बताया था.

उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

महानगर गैस लिमिटेड मुंबई के अलावा ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, लातूर, धाराशिव, चित्रदुर्ग और दावणगेरे जैसे क्षेत्रों में 500 से अधिक सीएनजी स्टेशनों के माध्यम से 13 लाख से अधिक वाहनों को ईंधन आपूर्ति करती है. इसके साथ ही लगभग 32 लाख घरों में पीएनजी (PNG) की आपूर्ति की जाती है. गैस वितरकों पर लगातार बढ़ रहे लागत के दबाव का असर अब सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है.