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इंदौर में 9 लोगों की मौत की वजह हुई कनफर्म, लैव रिपोर्ट में हुआ सच का बड़ा खुलासा

इंदौर में उल्टी-दस्त के प्रकोप से नौ लोगों की मौत का कारण दूषित पीने का निकला. लैब रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि पाइपलाइन लीकेज से पानी संक्रमित हुआ, जिससे 1,400 से अधिक लोग बीमार पड़े.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
इंदौर में 9 लोगों की मौत की वजह हुई कनफर्म, लैव रिपोर्ट में हुआ सच का बड़ा खुलासा
Courtesy: social media

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सामने आए उल्टी-दस्त के गंभीर प्रकोप ने प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रयोगशाला जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दूषित पेयजल इस त्रासदी का मुख्य कारण बना. अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है और 1,400 से अधिक लोग इसकी चपेट में आए हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे आपातकाल जैसी स्थिति बताया है और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

दूषित पानी से फैला संक्रमण

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इंदौर के भगिरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त का यह प्रकोप पीने के पानी के दूषित होने से फैला. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी में संक्रमण की पुष्टि हुई है. हालांकि रिपोर्ट के तकनीकी विवरण साझा नहीं किए गए, लेकिन कारण को लेकर कोई संदेह नहीं छोड़ा गया.

पाइपलाइन लीकेज बनी वजह

प्रशासनिक जांच में सामने आया कि भगिरथपुरा में मुख्य पेयजल पाइपलाइन में रिसाव था. यह लीकेज एक पुलिस चौकी के पास उस स्थान पर पाया गया, जहां पाइपलाइन के ऊपर शौचालय बना हुआ था. अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से गंदगी पानी में मिल गई और इलाके में सप्लाई होने वाला पानी दूषित हो गया.

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पूरे क्षेत्र की जल आपूर्ति लाइन की जांच की जा रही है, ताकि कहीं और लीकेज न हो. जांच के बाद गुरुवार को पाइपलाइन से साफ पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई. एहतियात के तौर पर लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है. साथ ही, राज्यभर के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की बात कही गई है.

मानवाधिकार आयोग की दखल

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. आयोग का कहना है कि स्थानीय लोग कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई. आयोग ने मौतों को गंभीर लापरवाही का परिणाम मानते हुए जवाब मांगा है.

मरीजों की स्थिति और स्वास्थ्य सर्वे

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भगिरथपुरा की 1,714 घरों में सर्वे कर 8,571 लोगों की जांच की गई. इनमें 338 लोगों में हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया. पिछले आठ दिनों में 272 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 71 को छुट्टी मिल चुकी है. फिलहाल 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 32 आईसीयू में हैं.