धार: परीक्षा हॉल में जहां छात्र-छात्राएं सवालों से जूझ रहे थे, वहां एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको स्तब्ध कर दिया. मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर पीथमपुर में एक नाबालिग लड़की ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के बीच ही मां बनकर दुनिया को चौंका दिया. गणित का पेपर लिखते-लिखते अचानक पेट दर्द हुआ, वह बाथरूम चली गई और वहां नवजात को जन्म दे दिया. यह घटना न सिर्फ हैरान करने वाली है, बल्कि समाज में किशोरावस्था की जागरूकता और परिवार की निगरानी की कमी को भी उजागर करती है. पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है.
मंगलवार को पीथमपुर के सेक्टर-1 थाना क्षेत्र स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के एक निजी स्कूल में 10वीं बोर्ड की गणित परीक्षा चल रही थी. परीक्षा केंद्र प्रभारी नरेंद्र कुमार पोथे के मुताबिक, 17 वर्षीय छात्रा सामान्य रूप से पेपर हल कर रही थी. अचानक वह शौचालय जाने की इजाजत मांगकर उठी. करीब 15 मिनट बीत गए, लेकिन वह वापस नहीं लौटी. संदेह होने पर एक महिला कर्मचारी को भेजा गया. कर्मचारी ने देखा कि बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था और नवजात बच्चे की रोने की आवाज आ रही थी.
घटना की सूचना मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस और 108 एंबुलेंस को सूचित किया. मौके पर पहुंची टीम ने दरवाजा खुलवाया और छात्रा को बाहर निकाला. नवजात बच्चा भी सुरक्षित था. एंबुलेंस से दोनों को पीथमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं. यह घटना परीक्षा केंद्र में इतनी तेजी से हुई कि अन्य छात्रों को भी झटका लगा.
पुलिस पूछताछ में छात्रा ने बताया कि वह बेटमा थाना क्षेत्र की रहने वाली है. पिछले दो साल से कान्हा बर्मन नामक युवक से उसका संपर्क था. पिछले एक साल से दोनों के बीच शारीरिक संबंध थे, जिससे वह गर्भवती हो गई. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसके परिवार को इस बारे में कुछ पता नहीं था. वह गर्भावस्था को छिपाकर परीक्षा देने आई थी. सेक्टर-1 थाना पुलिस ने POCSO एक्ट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है.
उप निरीक्षक चांदनी सिंगार के नेतृत्व में जांच टीम सक्रिय है. छात्रा के बयानों के आधार पर कान्हा बर्मन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. पुलिस अब आरोपी युवक की तलाश में जुटी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच तेज की जा रही है. यह घटना समाज में किशोरों की सुरक्षा, यौन शिक्षा और परिवार की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती है.