भोपाल: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), भोपाल ने मेडिकल साइंस में एक बड़ी कामयाबी हासिल करके मेडिकल दुनिया को चौंका दिया है. दावा किया जा रहा है कि डॉक्टरों ने इंसानी शरीर में एक नई लार ग्रंथि की खोज की है. साथ ही बोला जा रहा है कि इसके बारे में पहले पता नहीं था. इस ग्रंथि पर तीन साल तक रिसर्च चली. सबसे खास बात यह है कि AIIMS ने करीब 150 लाशों पर रिसर्च की.
मध्य प्रदेश के AIIMS के डॉक्टरों ने मेडिकल दुनिया में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. इससे इंसानी शरीर में एक नई लार ग्रंथि की खोज का पता चला है. डॉक्टरों के मुताबिक, यह ग्लैंड नाक के पीछे, गले के ऊपरी हिस्से या नेजोफैरिंक्स में होती है. इस खोज पर करीब तीन साल से रिसर्च चल रही है. AIIMS ने 150 सुरक्षित रखे गए शवों की जांच के बाद इसकी साफ पहचान की है. इस ग्लैंड का नाम ट्यूबरियल ग्लैंड रखा गया है. ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर इस खोज को मेडिकल साइंस में पूरी तरह से पहचान मिल जाती है, तो एनाटॉमी सिलेबस में बड़े बदलाव किए जाएंगे.
एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों की बड़ी शारीरिक खोज, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से चिकित्सा जगत में नई दिशा@mpprataprao pic.twitter.com/FYoIvECVuI
— AIIMS-Bhopal Official (@AIIMSBhopal) February 27, 2026
भोपाल AIIMS के मैक्सिलोफेशियल सर्जन और उनकी टीम ने राजधानी में मीडिया को बताया कि यह सलाइवरी ग्लैंड नाक-गले के जोड़ के पास एक खास जगह पर होती है. यह लंबी और थोड़ी तिकोनी होती है. सबसे खास बात यह है कि इसमें एक साफ नली होती है जिससे यह अपना सेक्रिशन निकालती है.
डॉक्टर के मुताबिक जब माइक्रोस्कोप से जांच की गई, तो इसकी बनावट नॉर्मल सलाइवरी ग्लैंड जैसी थी. यानी यह सिर्फ टिशू का एक गुच्छा नहीं था, बल्कि एक साफ और एक्टिव बनावट थी.
लार ग्रंथियां मुंह के अंदर और आसपास स्थित वे अंग है. यह लार पैदा करते है, जो भोजन को पचानेनिगलने और मुंह को कीटाणुओं से सुरक्षित रखने में मदद करती है. तीन प्रमुख ग्रंथियां (पैरोटिडसबमैंडिबुलरसबलिंगुअल) के साथ सैकड़ों छोटी ग्रंथियां प्रतिदिन लगभग 1200-1500 मिलीलीटर लार बनाती हैं. यह पाचन और मौखिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.