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ब्राह्मण लड़कियों वाले बयान पर बुरे फंसे IAS अधिकारी, सरकार ने भेजा कारण बताओ नोटिस

IAS अधिकारी संतोष वर्मा, जो मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJAKS) के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं ने ब्राह्मण लड़कियों के बारे में विवादित टिप्पणी की थी.

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Edited By: Princy Sharma
ब्राह्मण लड़कियों वाले बयान पर बुरे फंसे IAS अधिकारी, सरकार ने भेजा कारण बताओ नोटिस
Courtesy: Social Media

मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने IAS अधिकारी संतोष वर्मा को ब्राह्मणों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे बहुत गुस्सा फैल गया है. नोटिस में कहा गया है कि उनकी टिप्पणी सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाती है और समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करती है, जिसे ऑल इंडिया सर्विस नियमों के तहत गंभीर गलत काम माना जाता है.

IAS अधिकारी संतोष वर्मा, जो मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJAKS) के राज्य अध्यक्ष भी हैं, ने AJAKS के प्रांतीय सम्मेलन के दौरान यह विवादित बयान दिया. उन्होंने कहा, 'जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान नहीं करता, या उसके साथ संबंध नहीं बनाता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए.' सरकार का दावा है कि यह बयान पहली नजर में सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने वाला लगता है और एक सीनियर सिविल सर्वेंट के लिए यह गलत है.

नोटिस में क्या लिखा है?

नोटिस में ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968 और ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 का जिक्र है, जिसमें संतोष वर्मा से सात दिनों के अंदर यह बताने को कहा गया है कि रूल 10(1)(a) के तहत डिसिप्लिनरी एक्शन क्यों न लिया जाए. अगर सरकार उनके बर्ताव को गलत मानती है, तो इसके गंभीर एडमिनिस्ट्रेटिव नतीजे हो सकते हैं.

ब्राह्मण समुदायों के बीच गुस्सा

इस बयान से पूरे ब्राह्मण समुदाय में तुरंत गुस्सा फैल गया. ऑल इंडिया ब्राह्मण सोसाइटी ने वर्मा की बातों की अभद्र और आपत्तिजनक बताते हुए इसकी निंदा की और इसे समुदाय का सीधा अपमान बताया. सोसाइटी के राज्य अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने मांग की कि मुख्यमंत्री अधिकारी के खिलाफ सख्त एक्शन लें और चेतावनी दी कि कार्रवाई न करने पर पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं.

IAS ने बयान को लेकर दी सफाई

पुष्पेंद्र मिश्रा ने बताया कि ऐसे कमेंट्स ऑल इंडिया सर्विसेज के एथिक्स का उल्लंघन करते हैं और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ा' जैसी सरकारी पहलों के साथ टकराव करते हैं, जिनका मकसद लड़कियों को मजबूत बनाना है. इस विवाद पर जवाब देते हुए, IAS ऑफिसर संतोष वर्मा ने अपने कमेंट्स का बचाव करते हुए दावा किया कि उनका इरादा पॉलिटिकल उथल-पुथल पैदा करने का नहीं था. 

क्यों दिया था ये बयान?

उन्होंने बताया कि AJAKS मीटिंग के दौरान, एजेंडा धार्मिक के बजाय आर्थिक आधार पर रिजर्वेशन पॉलिसी पर चर्चा करना था. उन्होंने कहा कि 'रोटी-बेटी ट्रीटमेंट' के बारे में उनका बयान यह दिखाने के लिए था कि अगर वह और उनका परिवार फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट हैं, तो सोशल और इकोनॉमिक सपोर्ट जरूरत के आधार पर होना चाहिए, जाति के आधार पर नहीं और किसी कम्युनिटी का अपमान नहीं करना था. 

सरकार और कम्युनिटी अब शो-कॉज नोटिस पर संतोष वर्मा के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और इस मामले ने पूरे मध्य प्रदेश का ध्यान खींचा है, जिससे सिविल सर्विस एथिक्स, सोशल सद्भाव और ब्यूरोक्रेट्स के लिए बोलने की आजादी पर बहस छिड़ गई है.