नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को 'बड़ी लहर' की चेतावनी दिए जाने के बाद अमेरिकी बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों के ब्रिटेन और डिएगो गार्सिया बेस पर पहुंचने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने लंबी हिचकिचाहट के बाद अब रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई के लिए ब्रिटिश अड्डों के उपयोग की अनुमति दे दी है. यह फैसला ईरान की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए लिया गया है.
बी-2 स्पिरिट बमवर्षक जल्द ही ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड और हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया बेस पर तैनात हो सकते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार इन विमानों से अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अभियानों को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी. ये बमवर्षक अपनी अदृश्य तकनीक के लिए प्रसिद्ध हैं और गहरी पैठ वाले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. इन विमानों की मौजूदगी ईरान के विरुद्ध एक मजबूत घेराबंदी तैयार करेगी.
प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने शुरुआत में अमेरिका के इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था. हालांकि ईरान के मिसाइल हमलों के बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी. अब उन्होंने सीमित रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के उपयोग की मंजूरी दी है. मुख्य लक्ष्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल साइटों को निष्क्रिय करना है. बी-2 जैसे विमान जिनकी कीमत लगभग 2 अरब डॉलर है. अगले कुछ दिनों में वहां तैनात हो सकते हैं.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले तेज करने का संकल्प लिया है. उन्होंने सोमवार को कहा कि भीषण प्रहार अभी शुरू भी नहीं हुए हैं और एक 'बड़ी लहर' जल्द आने वाली है. युद्ध के सातवें दिन ट्रंप के बयानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पूरी ताकत झोंकने को तैयार हैं. इस चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा विशेषज्ञों और ऊर्जा बाजारों के बीच भारी हलचल पैदा कर दी है.
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार ब्रिटिश अड्डों की मदद से तेहरान पर हमलों की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी. इसमें बड़ी संख्या में बमवर्षक और लड़ाकू विमान शामिल होंगे जो लगातार स्ट्राइक करने में सक्षम होंगे. इस कदम का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को पंगु बनाना है. हेगसेथ का मानना है कि यह रणनीतिक सहयोग युद्ध के मैदान में अमेरिका को निर्णायक बढ़त दिलाएगा जिससे अभियान तेज होगा.
इजरायली सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने संकेत दिया कि संयुक्त अभियान का अगला चरण शुरू होने वाला है. इसमें ईरान की सैन्य नींव और परमाणु क्षमताओं को लक्षित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भविष्य में और भी चौंकाने वाली घटनाएं हो सकती हैं. यह अभियान मुख्य रूप से ईरान की नौसैनिक और परमाणु शक्ति को खत्म करने पर केंद्रित है. हालांकि इस भीषण संघर्ष की अंतिम समयसीमा को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है.