मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार रात किसान आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया. राज्य सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच करीब तीन घंटे चली बैठक समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, जिससे पुलिस और किसानों के बीच कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई. पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए किसानों से शांत रहने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, हालांकि स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई.
बैठक के बाद किसान कल्याण मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों के लिए कई राहत भरे फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की खरीद 25 प्रतिशत से बढ़ाकर पात्र किसानों की उपज के 60 प्रतिशत तक की जाएगी. सरकार के अनुसार, इस फैसले से नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी.
The farmers' protest continues in Bhopal, the capital of Madhya Pradesh, with their demand being that the MSP for moong be fixed so that farmers can benefit.
— Indian Observer (@ag_Journalist) July 29, 2026
Farmers are marching towards the CM's residence, while the police force is engaged in stopping the protest! #Bhopal… https://t.co/2NO8fhbQ7p pic.twitter.com/iHSFavUBIs
सरकार ने किसानों की अन्य मांगों पर भी कुछ फैसले लिए हैं. मूंग खरीद के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है, जबकि खरीद की अंतिम तारीख 10 अगस्त के बजाय 20 अगस्त तय की गई है. उर्वरक वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था को लेकर मिल रही शिकायतों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है. जांच पूरी होने तक उर्वरक वितरण के लिए ई-टोकन प्रणाली को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है
सरकार की घोषणाओं के बावजूद किसान संगठनों ने संतोष नहीं जताया. प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं. किसानों का आरोप है कि सरकार ने केवल आंशिक राहत देकर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की है. उनका कहना है कि जब तक सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे अपने आंदोलन को फिलहाल समाप्त नहीं करेंगे. दूसरी ओर, प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है. सरकार को उम्मीद है कि आगे की बातचीत से समाधान निकल सकता है, जबकि किसान अपने रुख पर कायम हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच एक और दौर की वार्ता होने की संभावना जताई जा रही है.