मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह सिविल अस्पताल की महिला डॉक्टर आरती दंडोतिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में डॉक्टर को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह इलाज नहीं करेंगी. वीडियो के आधार पर दावा किया गया कि उन्होंने सड़क हादसे में घायल मरीजों का इलाज करने से इनकार कर दिया.
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इस दावे को गलत बताया है. मामला अंबाह सिविल अस्पताल का है. जानकारी के अनुसार, सड़क हादसे में घायल तीन मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे. सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद यह दावा किया गया कि महिला डॉक्टर ने घायलों का इलाज करने से मना कर दिया और उन्हें अस्पताल से जाने के लिए कह दिया.
मध्य प्रदेश के मुरैना के सिविल अस्पताल अंबाह की महिला डॉक्टर आरती दंडोतिया का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो के साथ मरीजों का इलाज न करने का दावा किया जा रहा था, लेकिन BMO प्रमोद शर्मा के मुताबिक तीनों घायल मरीजों का उपचार किया गया था। उनके अनुसार, वायरल वीडियो उपचार के… pic.twitter.com/cZCzFDoDol
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हालांकि अंबाह के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. प्रमोद शर्मा ने इन दावों को खारिज किया है. उनके अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद तीनों घायल मरीजों का डॉक्टर ने समय पर इलाज किया था.
BMO ने बताया कि मरीजों का इलाज पूरा होने के बाद किसी बात को लेकर डॉक्टर और मरीजों के साथ आए परिजनों के बीच कहासुनी हो गई. इसी दौरान डॉक्टर का वीडियो बनाया गया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया. BMO के मुताबिक वायरल वीडियो उस समय का है जब मरीजों का इलाज हो चुका था और डॉक्टर तथा परिजनों के बीच विवाद चल रहा था. इसलिए वीडियो के आधार पर यह कहना सही नहीं है कि डॉक्टर ने घायलों का इलाज करने से इनकार किया था.
वायरल वीडियो में डॉक्टर आरती दंडोतिया कुर्सी से उठकर दूसरे कमरे की ओर जाती हुई नजर आती हैं. इसी दौरान उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, "मैं इलाज नहीं करूंगी."
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग दावे किए गए. कुछ पोस्ट में आरोप लगाया गया कि डॉक्टर ने घायलों को इलाज देने से साफ इनकार कर दिया था. हालांकि, अस्पताल प्रशासन के स्पष्टीकरण के अनुसार वीडियो को उसके पूरे संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए.
डॉ. प्रमोद शर्मा ने स्पष्ट किया कि तीनों घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार मिल चुका था. इसके बाद विवाद की स्थिति बनी और उसी दौरान का वीडियो वायरल हुआ. स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के अनुसार मरीजों का इलाज नहीं किए जाने का दावा सही नहीं है.