बेंगलुरु: महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने बेंगलुरु में 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुई विमान दुर्घटना के संबंध में जीरो FIR दर्ज कराई है. इस दुर्घटना में उनके चाचा और चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी. यह FIR NCP (SP) विधायक द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद दर्ज की गई, जिसमें इस घटना के पीछे एक बड़ी आपराधिक साजिश होने का आरोप लगाया गया था.
जीरो FIR एक ऐसी पुलिस शिकायत होती है जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही अपराध असल में कहीं और हुआ हो. इस FIR को 'जीरो' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे शुरू में सीरियल नंबर 0 के साथ रजिस्टर किया जाता है और बाद में जांच के लिए इसे संबंधित पुलिस थाने में भेज दिया जाता है.
रोहित पवार ने हाई ग्राउंड्स पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि इस दुर्घटना के पीछे एक बड़ी आपराधिक साजिश है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिकायतें करने के बावजूद इस मामले को शुरू में महाराष्ट्र में दर्ज नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें बेंगलुरु पुलिस से संपर्क करना पड़ा.
हाल ही में सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए, जिसमें दिल्ली में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई के कथित अपमान को लेकर कर्नाटक में जीरो FIR दर्ज की गई थी, पवार ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस की कथित निष्क्रियता के कारण अजित पवार के मामले में भी इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करना पड़ा.
रोहित पवार द्वारा दर्ज कराई गई जीरो FIR में 'भारतीय न्याय संहिता' की कई धाराओं का जिक्र किया गया है, जिनमें गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही और जान को खतरे में डालने से संबंधित आरोप शामिल हैं.
शिकायत के अनुसार एक निजी कंपनी 'VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा संचालित यह विमान कथित तौर पर उड़ान भरने के लिए फिट नहीं था. शिकायत में विमान के रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड में हेराफेरी और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं. इसके अलावा शिकायत में पायलट के पिछले रिकॉर्ड आखिरी समय में क्रू में किए गए बदलावों और खराब विजिबिलिटी की स्थिति में उड़ान से जुड़े संदिग्ध फैसलों को लेकर भी चिंताएं जाहिर की गई हैं.
रोहित पवार ने बताया कि महाराष्ट्र में FIR दर्ज कराने की उनकी कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके बाद उन्हें बेंगलुरु पुलिस से संपर्क करना पड़ा. बेंगलुरु पुलिस ने जीरो FIR दर्ज की और बाद में उसे जांच के लिए पुणे स्थित संबंधित पुलिस थाने को सौंप दिया. रोहित पवार के अनुसार उन्होंने 25 फरवरी को मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन और 26 फरवरी को बारामती पुलिस स्टेशन से संपर्क किया था, लेकिन कोई FIR दर्ज नहीं की गई. बाद में पुणे CID ने उन्हें बताया कि केवल एक 'आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट' यानी ADR की ही जांच की जा रही है.