बुधवार को कर्नाटक विधानसभा में एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी और कीमतों में तेज उछाल को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. कांग्रेस विधायकों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला और विदेश नीति को दोषी ठहराया. मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा कि केंद्र ने संसद को गुमराह किया. बीजेपी ने वैश्विक तनाव का हवाला दिया और राज्य सरकार पर पलटवार किया. बेंगलुरु के होटल-रेस्तरां संकट में हैं, जहां वाणिज्यिक सिलेंडर नहीं मिल रहे. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर मासिक देने का वादा किया है.
कुणिगल से कांग्रेस विधायक एचडी रंगनाथ ने कहा कि घरेलू सिलेंडर 900 रुपये से बढ़कर 1800 और कमर्शियल 2000 से 4000 रुपये हो गया है. उन्होंने सरकार की कमजोर विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया. प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया कि 9 फरवरी को संसद को 75 दिनों का स्टॉक बताया गया, लेकिन 7 मार्च को कीमत बढ़ाई गई और 10 मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया.
बीजेपी विधायक वी सुनील कुमार ने कहा कि कमी वैश्विक संघर्षों के कारण है, न कि केंद्र की नीति से. उन्होंने कांग्रेस सरकार पर तंज कसा कि राज्य में रेत और दवाइयों की भी कमी है. विपक्ष के नेता आर अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर होटल मालिकों को हड़ताल के लिए उकसाने का आरोप लगाया. सिद्धरमैया ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ विरोध का समर्थन किया, उकसाया नहीं.
बेंगलुरु के व्यावसायिक क्षेत्र में सिलेंडर की कमी से होटल और कैटरिंग पर गहरा असर पड़ा है. तीनों सरकारी तेल कंपनियों से सप्लाई अचानक कम होने से वितरक घरेलू और जरूरी संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं. शादी-विवाह के सीजन में रेस्तरां मालिक परेशान हैं. कुछ जगहों पर कालाबाजारी शुरू हो गई है, जहां सिलेंडर ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं.
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा ने कहा कि सरकार तेल कंपनियों के साथ मिलकर हर घर को महीने में कम से कम एक सिलेंडर देने की कोशिश कर रही है. अस्पतालों को निर्बाध सप्लाई मिलेगी. आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर कालाबाजारी रोकी जा रही है. वेल्स फार्गो के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर कट्टाकम ने सुझाव दिया कि कंपनियां वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा दें ताकि ईंधन की बचत हो.