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अब नहीं होगी शनिवार को सुबह जल्दी उठने की टेंशन, कर्नाटक ने बदला स्कूल टाइमिंग

कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के लिए शनिवार का समय एक समान करते हुए सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित कर दिया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
अब नहीं होगी शनिवार को सुबह जल्दी उठने की टेंशन, कर्नाटक ने बदला स्कूल टाइमिंग
Courtesy: Pinterest (Representative image)

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के लिए शनिवार के स्कूल समय को एक समान कर दिया है. नए आदेश के अनुसार अब पूरे राज्य में शनिवार को सभी स्कूल सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक चलेंगे. इस फैसले का उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना और अलग अलग समय की वजह से होने वाली परेशानी को खत्म करना है.

अब तक राज्य के अलग अलग जिलों और स्कूलों में शनिवार का समय अलग था. कुछ स्कूल सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक चलते थे, जबकि कुछ में 8 बजे से 12 बजे तक कक्षाएं लगती थीं. इससे अभिभावकों और छात्रों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता था. शिक्षा विभाग ने अब इस व्यवस्था को बदलते हुए सभी स्कूलों के लिए एक ही समय निर्धारित कर दिया है.

शिक्षा विभाग का क्या है कहना?

शिक्षा विभाग का कहना है कि नए समय से छात्रों को शनिवार को बहुत जल्दी उठने की जरूरत नहीं होगी. सभी स्कूल एक ही समय पर खुलेंगे और बंद होंगे, जिससे बच्चों की दिनचर्या अधिक व्यवस्थित होगी. अभिभावकों को भी हर स्कूल के अलग समय की चिंता नहीं करनी पड़ेगी और उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने में सुविधा होगी.

इस फैसले से क्या होगा फायदा?

इस फैसले से शिक्षकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है. राज्य सरकार ने शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया है. अलग अलग समय होने के कारण कई बार समय पर उपस्थिति दर्ज करने में दिक्कत आती थी. अब पूरे राज्य में एक समान समय होने से ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को लागू करना आसान होगा और समय का बेहतर पालन हो सकेगा.

इसी बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भारत के आपातकाल और चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को भी शामिल किया है. अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड नामक इस नई पुस्तक में पहली बार एसआईआर प्रक्रिया को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है.

नई पुस्तक में भारतीय लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों, आपातकाल और मतदाता सूची सत्यापन प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है. हालांकि एसआईआर को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद इस पर चर्चा शुरू हो गई है. कई लोगों का मानना है कि चुनाव और राजनीतिक विषयों को स्कूल की पढ़ाई में शामिल करने पर व्यापक बहस होनी चाहिए, जबकि अन्य इसे लोकतंत्र की समझ बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं.