बल्लारी: कर्नाटक के बल्लारी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां सरकारी मदद नहीं मिलने से परेशान किसानों ने खुद ही चंदा जुटाकर अपनी सड़क की मरम्मत कर डाली. करीब 150 किसानों ने मिलकर 3 लाख रुपये इकट्ठा किए और 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क को फिर से उपयोग योग्य बनाया.
यह सड़क लगभग 500 एकड़ सिंचित कृषि भूमि तक पहुंचने का मुख्य मार्ग है. किसान लंबे समय से इसकी खराब स्थिति से परेशान थे. भारी बारिश के बाद सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे, जिससे खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था. किसानों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण कई दुर्घटनाएं भी हुईं और कई लोग घायल हुए.
Frustrated by official inaction, 150 farmers #Ballari #Karnataka pooled 3 lakh and repaired a 3.5 km service road serving 500 acres of farmland. The road had become dangerous due to potholes and waterlogging. Farmers say authorities ignored repeated pleas. pic.twitter.com/uvlXF7dohI
— Imran Khan (@KeypadGuerilla) June 22, 2026
किसानों के अनुसार उन्होंने कई बार संबंधित सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क की मरम्मत कराने की मांग की थी. हालांकि उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. लगातार इंतजार और परेशानी के बाद किसानों ने स्वयं ही समाधान निकालने का फैसला किया.
मरम्मत कार्य के लिए किसानों ने प्रति एकड़ 2,000 रुपये का योगदान दिया. इसके बाद ट्रैक्टर, जेसीबी मशीन और बजरी की मदद से पूरी सड़क की मरम्मत की गई. किसानों ने सड़क को समतल कर सुरक्षित बनाया ताकि खेतों तक आवागमन आसान हो सके और दुर्घटनाओं का खतरा कम हो.
किसान लोकेश ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब ग्रामीणों को खुद सड़क की मरम्मत करनी पड़ी हो. उन्होंने कहा कि लगभग तीन साल पहले भी किसानों ने आपस में पैसा जुटाकर सड़क की मरम्मत कराई थी. लेकिन पिछले वर्ष हुई भारी बारिश ने सड़क को फिर से क्षतिग्रस्त कर दिया और कई हिस्सों में बड़े गड्ढे बन गए.
लोकेश के अनुसार पास की नहर का पानी हर साल सड़क पर आ जाता है, जिससे सड़क बार-बार टूट जाती है. उन्होंने कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक किसानों को हर कुछ वर्षों में इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी.
किसानों ने अब प्रशासन से स्थायी सीमेंट-कंक्रीट सड़क बनाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि पक्की सड़क बनाई जाती है तो हर दो-तीन साल में मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी और किसानों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी.