नई दिल्ली: कर्नाटक में गुरुवार को शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पहले उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर दिया. यह सत्र 22 से 31 जनवरी तक प्रस्तावित है और इसकी शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होनी थी. सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की आशंका पहले से ही थी, लेकिन राज्यपाल के फैसले ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है.
राज्यपाल थावरचंद गहलोत के अभिभाषण से इनकार के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं. इस घटनाक्रम के बाद कर्नाटक सरकार हरकत में आ गई है. सरकार ने कहा है कि कानून मंत्री के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार शाम 5.45 बजे राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात करेगा. इस मुलाकात में स्थिति स्पष्ट करने और संवैधानिक परंपराओं पर चर्चा की संभावना है.
कर्नाटक विधानसभा का यह सत्र पहले से ही काफी संवेदनशील माना जा रहा था. कांग्रेस सरकार और भाजपा जेडीएस गठबंधन के बीच कई मुद्दों पर टकराव तय माना जा रहा है. खासतौर पर केंद्र सरकार के उस फैसले को लेकर विवाद है, जिसमें मनरेगा को हटाकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम लागू करने की घोषणा की गई है. विपक्ष इसे राज्यों के अधिकारों पर हमला बता रहा है.
कर्नाटक की स्थिति से एक दिन पहले केरल विधानसभा में भी राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव देखने को मिला. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत अभिभाषण के कुछ हिस्से पढ़े बिना छोड़ दिए और कुछ नए शब्द जोड़ दिए. विजयन के अनुसार, हटाए गए हिस्सों में केंद्र सरकार की वित्तीय नीतियों की आलोचना शामिल थी.
राज्यपालों के अभिभाषण को लेकर टकराव की तस्वीर तमिलनाडु में भी सामने आई थी. वहां राज्यपाल आर एन रवि ने सरकार का अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर दिया और सदन से बाहर चले गए. इस दौरान विधानसभा में तीखी बहस हुई. स्पीकर एम अप्पावु ने राज्यपाल से सदन की परंपराओं और नियमों का पालन करने की अपील की थी.
लगातार अलग अलग राज्यों में राज्यपालों और निर्वाचित सरकारों के बीच टकराव ने संघीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्यपाल संवैधानिक मर्यादाओं से हटकर केंद्र सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं. वहीं केंद्र समर्थक दल इसे राज्यपालों का अधिकार बताते हैं. कर्नाटक में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राजभवन और सरकार के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं.