चिक्कबल्लापुर: कारगिल युद्ध में देश के लिए मोर्चे पर डटे एक पूर्व सैनिक की जिंदगी में जमीन का विवाद इतना लंबा खिंच गया कि मामला बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया. कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में पूर्व सैनिक शिवानंद रेड्डी ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की कोशिश की. उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और एक निजी अस्पताल के ICU में उनका इलाज चल रहा है. बताया जा रहा है कि जमीन आवंटन को लेकर वह करीब दो दशक से संघर्ष कर रहे थे.
शिवानंद रेड्डी भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं. उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान भी देश की ओर से मोर्चा संभाला था. युद्ध के दौरान उनके पैर में चोट लगी थी. इसके बावजूद उन्होंने सैन्य सेवा जारी रखी. लेकिन सेवा से अलग होने के बाद जमीन आवंटन का मुद्दा उनके लिए लंबे संघर्ष में बदल गया. करीब 20 साल तक यह मामला सुलझ नहीं सका और आखिरकार उनकी कथित आत्महत्या की कोशिश के बाद फिर सामने आया.
जानकारी के अनुसार, सरकारी प्रावधानों के तहत पात्र पूर्व सैनिकों को जमीन आवंटित करने का प्रावधान है. शिवानंद रेड्डी भी इसी आधार पर जमीन पाने की मांग कर रहे थे. उनका कहना था कि वह इस मामले को लेकर लगभग 20 वर्षों से लगातार प्रयास कर रहे हैं. इतने लंबे समय तक समाधान नहीं मिलने के बाद उन्होंने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया. इस घटना ने जमीन आवंटन से जुड़े मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
बताया जा रहा है कि शिवानंद रेड्डी को पहले दो अलग अलग जमीनें आवंटित करने की पेशकश की गई थी. हालांकि, उन्होंने दोनों विकल्पों को स्वीकार नहीं किया. उनकी मांग थी कि उन्हें उनकी अपेक्षा के अनुसार बेहतर जमीन दी जाए. जमीन को लेकर उनकी यह मांग लंबे समय से विवाद का हिस्सा बनी हुई थी. इसी बीच मामला आगे बढ़ता रहा, लेकिन उनकी अपेक्षा के मुताबिक समाधान नहीं हो पाया.
जमीन के इसी विवाद के बीच शिवानंद रेड्डी ने कथित तौर पर जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की. घटना के बाद उन्हें तत्काल इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत गंभीर होने के कारण उन्हें ICU में रखा गया है. डॉक्टर उनकी निगरानी में इलाज कर रहे हैं. फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है और उपचार जारी है.