पाकिस्तान में एक पुराने हिंदू मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने का मामला सामने आया है. इस घटना को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने नाराजगी जताई है. संगठन का आरोप है कि करीब 100 साल पुराने मंदिर को मदरसा बनाने के लिए ध्वस्त किया गया. VHP ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने और पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की अपील की है.
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान में हिंदू और सिख समुदाय की स्थिति को लेकर चिंता जताई. उन्होंने दावा किया कि मंदिर को गिराने के पीछे उसे हटाकर मदरसा बनाने का उद्देश्य था. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मंदिर के स्थान और उसे गिराए जाने की परिस्थितियों को लेकर स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है.
सुरेंद्र जैन ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान सरकार के सामने यह मामला उठाने और वहां रहने वाले हिंदुओं तथा सिखों को धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित कराने की मांग की. VHP की ओर से यह भी दावा किया गया कि हाल के समय में पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों को लेकर भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं.
#WATCH | Patiala, Punjab | On demolition of a 100-year-old Hindu temple in Pakistan, Vishwa Hindu Parishad (VHP) spokesperson Surendra Jain says, "Today, a 100-year-old temple was demolished in Pakistan. Jihadis tore it down to build a madrasa... Just two months ago, a… pic.twitter.com/syMiOUXSN4
— ANI (@ANI) September 2, 2026Also Read
रिपोर्ट में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक पुराने गुरुद्वारा साहिब को कथित तौर पर गिराए जाने का मामला भी उठाया गया है. पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने इस मामले को लेकर केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष मुद्दा उठाने की मांग की है. खन्ना ने गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण के साथ साथ वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है.
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित गुरुद्वारे को हटाकर वहां बाजार परिसर बनाए जाने का दावा किया गया है. इस मामले ने पाकिस्तान में सिख समुदाय से जुड़े ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस क्षेत्र में पहले करीब 12 गुरुद्वारे मौजूद थे, वहां अब उनकी संख्या घटकर दो रह गई है. धार्मिक संपत्ति की जमीन को निजी बिल्डर को दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध स्रोत में नहीं दी गई है.