बेंगलुरु में कॉन्फिडेंट ग्रुप के चेयरमैन सीजे रॉय की कथित आत्महत्या के बाद कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आ गया है. इस मामले को लेकर कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है. प्रियांक खड़गे ने कहा कि सीजे रॉय की मौत इनकम टैक्स और ED के अधिकारियों द्वारा किए गए उत्पीड़न का नतीजा हो सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में IT ED और GST विभागों का इस्तेमाल उन SMEs MSMEs व्यक्तियों और उद्योगपतियों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है, जो सरकार के साथ खड़े नहीं हैं.
खड़गे के अनुसार कर्नाटक में यह तीसरा या चौथा ऐसा मामला है, जहां कारोबारी दबाव और जांच के चलते मानसिक तनाव में आ गए. उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों को उत्पीड़न का हथियार बना दिया गया है और कानूनी रूप से काम करने वाले लोगों पर भी अनुचित दबाव डाला जा रहा है.
कर्नाटक मंत्री ने यह भी कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं है. सीजे रॉय के परिवार ने भी इसी तरह के दावे किए हैं. खड़गे ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी और यह भी देखा जाएगा कि मौके पर मौजूद इनकम टैक्स अधिकारियों की भूमिका क्या थी. उन्होंने कहा कि जो भी मामला हो, जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए. अगर किसी अधिकारी ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए.
इस मामले पर कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने भी अहम जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि सीजे रॉय की कंपनी पर दिसंबर 2025 में इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा था. इसके बाद उन्हें चार्जशीट दाखिल करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया था.
परमेश्वर के मुताबिक चार्जशीट दाखिल करने की आखिरी तारीख 4 फरवरी तय की गई थी. सीजे रॉय तीन दिन पहले ही दुबई से लौटे थे. इनकम टैक्स अधिकारी उनका बयान दर्ज करने के लिए उनके कार्यालय गए थे और रॉय ने जांच में सहयोग भी किया था.
शनिवार को सीजे रॉय की पत्नी लीना रॉय और बेटे रोहित रॉय कर्नाटक प्रदेश यूथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद नलपाड के साथ बेंगलुरु के बोवरिंग अस्पताल स्थित पोस्टमॉर्टम सेंटर पहुंचे. इस दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा. परिवार की मौजूदगी ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है. विपक्षी दल इस घटना को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.