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झारखंड SIR में Form 7 को लेकर विवाद, जानें क्या है यह फॉर्म और कैसे हटता है वोटर का नाम

Form 7 मतदाता सूची में नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने का आधिकारिक माध्यम है. लेकिन केवल Form 7 जमा होने से किसी मतदाता का नाम नहीं हटता.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
झारखंड SIR में Form 7 को लेकर विवाद, जानें क्या है यह फॉर्म और कैसे हटता है वोटर का नाम
Courtesy: Pinterest

रांची: झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर Form 7 चर्चा में है. कई जगहों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग से विवाद खड़ा हुआ है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि Form 7 क्या है, इसका इस्तेमाल कौन कर सकता है और किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले चुनाव आयोग की प्रक्रिया क्या होती है.

मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत Form 7 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है. कोई मतदाता अपना नाम हटाने के लिए भी Form 7 भर सकता है. इसके अलावा अपने निर्वाचन क्षेत्र में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर भी आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है.

किन आधार पर नाम हटाने की मांग की जा सकती है?

Form 7 में आपत्ति के लिए पांच प्रमुख कारण दिए जाते हैं. इनमें मतदाता की मृत्यु, नाबालिग होना, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना या अनुपस्थित होना, पहले से मतदाता सूची में नाम दर्ज होना और भारतीय नागरिक नहीं होना शामिल है.

कौन दाखिल कर सकता है Form 7?

किसी निर्वाचन क्षेत्र से किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करने वाला व्यक्ति उसी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता होना चाहिए. आवेदन में आवेदक का नाम, EPIC नंबर और मोबाइल नंबर देना होता है. जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति है, उसका नाम, EPIC नंबर और पता भी उपलब्ध जानकारी के अनुसार देना होता है.

Form 7 ऑनलाइन मतदाता पोर्टल के माध्यम से या संबंधित BLO के जरिए जमा किया जा सकता है. ECINet ऐप के जरिए भी ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है. आवेदन के साथ सामान्य तौर पर कोई प्रमाण अपलोड करना जरूरी नहीं होता, लेकिन आवेदक को घोषणा देनी होती है.

क्या है सबसे महत्वपूर्ण?

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है. Form 7 दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम तुरंत मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 22 के तहत ERO को मामले की जांच करनी होती है. आवेदन मिलने के बाद संबंधित मतदाता को नोटिस देकर जवाब देने का अवसर दिया जाता है. उसे आम तौर पर सात दिन का समय दिया जाता है.

इसके बाद सुनवाई और आवश्यक जांच के बाद ERO आदेश पारित करता है. BLO भी मामले के सत्यापन के लिए फील्ड विजिट कर सकता है. किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी हो, वह संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी नहीं रहा हो या कानून के तहत मतदाता बनने के लिए अपात्र पाया गया हो, तो निर्धारित प्रक्रिया के बाद उसका नाम हटाया जा सकता है.

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