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झारखंड की जेलों में बड़ा बदलाव! कैदियों को मिलेगी आजादी... सुबह बाहर जाकर कर सकेंगे नौकरी

झारखंड में चुनिंदा कैदियों को दिन में जेल से बाहर जाकर काम करने और शाम को वापस लौटने की अनुमति देने की तैयारी है. यह व्यवस्था चार केंद्रीय जेलों में शुरू होगी.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
झारखंड की जेलों में बड़ा बदलाव! कैदियों को मिलेगी आजादी... सुबह बाहर जाकर कर सकेंगे नौकरी
Courtesy: AI

झारखंड में जेलों के भीतर सुधार की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है. राज्य सरकार अब अच्छे आचरण वाले चुनिंदा कैदियों को दिन के समय जेल से बाहर जाकर काम करने और अपनी आजीविका कमाने का मौका देगी.

काम पूरा करने के बाद उन्हें शाम को वापस जेल लौटना होगा. शुरुआत रांची, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम और दुमका की केंद्रीय जेलों से होगी. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से कैदियों को समाज की मुख्यधारा से दोबारा जुड़ने में मदद मिलेगी.

चार केंद्रीय जेलों में होगी शुरुआत

यह व्यवस्था बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल रांची, जय प्रकाश नारायण सेंट्रल जेल हजारीबाग, घाघीडीह सेंट्रल जेल पूर्वी सिंहभूम और दुमका सेंट्रल जेल में लागू करने की तैयारी है. इन जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक के लिए जगह और संबंधित सेल की पहचान की जा चुकी है. जेल प्रशासन अब इन्हें नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार करेगा.

सुबह निकलेंगे, शाम को जेल लौटेंगे

जेल IG सुदर्शन मंडल के अनुसार, चयनित कैदियों को सुबह करीब 6 या 7 बजे बाहर जाकर काम करने की अनुमति मिल सकती है. इसके बाद लगभग 12 घंटे के भीतर उन्हें जेल वापस लौटना होगा. इन जेलों के शहरों में स्थित होने के कारण कैदियों के लिए रोजगार के अवसर मिलने की संभावना अधिक बताई गई है.

अच्छा व्यवहार बनेगा पात्रता का आधार

हर कैदी को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा. इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार की जाएगी. इसमें कैदी के अच्छे व्यवहार और जेल के नियमों का पालन करने को प्रमुख आधार बनाया जाएगा. सरकार का उद्देश्य ऐसे कैदियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने का अवसर देना है, ताकि रिहाई के बाद सामान्य जीवन में लौटना उनके लिए आसान हो सके.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से जुड़ा फैसला

यह पहल सुप्रीम कोर्ट के सुहास चकमा बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के बाद आगे बढ़ी है. अदालत ने राज्यों से ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन की संभावना पर विचार करने को कहा था. अलग संस्थान बनाना संभव न होने पर मौजूदा जेलों में ओपन या सेमी-ओपन बैरक बनाने का विकल्प सुझाया गया था. झारखंड जेल और सुधार सेवा अधिनियम, 2025 में भी ओपन सुधार संस्थान का प्रावधान मौजूद है.