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100 साल पुराना वो पन्ना आज भी है! गांधीजी ने जहां लिखे थे शब्द, पलामू में संभालकर रखा है इतिहास

झारखंड के पलामू में महात्मा गांधी की 1927 की यात्रा से जुड़ी यादें आज भी दस्तावेजों और स्थानीय परिवारों के पास सुरक्षित हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
100 साल पुराना वो पन्ना आज भी है! गांधीजी ने जहां लिखे थे शब्द, पलामू में संभालकर रखा है इतिहास
Courtesy: Pinterest

इतिहास की बड़ी घटनाएं अक्सर किताबों के पन्नों में दर्ज होती हैं, लेकिन कभी-कभी कोई पुराना रजिस्टर भी बीते दौर की ऐसी कहानी संभालकर रखता है, जिसे देखकर इतिहास आंखों के सामने उतर आता है. झारखंड के पलामू में महात्मा गांधी की 1927 की यात्रा से जुड़ी ऐसी ही एक स्मृति आज भी सुरक्षित है. गांधीजी जनवरी 1927 में तीन दिवसीय दौरे पर पलामू पहुंचे थे और डालटनगंज में उनका प्रवास छेदीलाल सर्राफ के बगान में हुआ था.

इस यात्रा के दौरान गांधीजी ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सहयोगियों का उत्साह बढ़ाया. 11 जनवरी का दिन उनके पलामू प्रवास में खास रहा. इसी दिन डालटनगंज म्यूनिसिपल बोर्ड की ओर से उन्हें अभिनंदन पत्र दिया गया. तत्कालीन नागरिक मंच ने भी जयवंश सहाय के नेतृत्व में गांधीजी का स्वागत किया और उन्हें स्मारपत्र सौंपा. इसी दौरान उन्होंने मारवाड़ी पुस्तकालय का भी दौरा किया, जहां उनकी लिखी शुभकामना आज भी रजिस्टर में दर्ज है.

जब डालटनगंज में गांधीजी का हुआ स्वागत

जनवरी 1927 में गांधीजी के पलामू पहुंचने पर स्थानीय स्तर पर उनके स्वागत की तैयारियां हुई थीं. 11 जनवरी को डालटनगंज म्यूनिसिपल बोर्ड ने उन्हें अभिनंदन पत्र सौंपा. इसके अलावा तत्कालीन नागरिक मंच के अध्यक्ष जयवंश सहाय के नेतृत्व में शहर के लोगों ने भी गांधीजी का अभिनंदन किया. उन्हें स्मारपत्र दिया गया. इन घटनाओं से उस समय पलामू में स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर बन रहे माहौल की झलक मिलती है.

एक रजिस्टर में मिलती है उस दौर की झलक

गांधीजी 11 जनवरी को डालटनगंज के मारवाड़ी पुस्तकालय भी पहुंचे थे. यहां उन्होंने पुस्तकालय के रजिस्टर में अपने हाथ से उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना लिखी. गांधीजी की हस्तलिखित शुभकामना वाला यह रजिस्टर आज उनके पलामू दौरे की महत्वपूर्ण स्मृति माना जाता है. किसी ऐतिहासिक घटना से जुड़ा ऐसा दस्तावेज उस दौर की गतिविधियों को समझने के लिए खास महत्व रखता है और स्थानीय इतिहास को सीधे उस समय से जोड़ता है.

बगान में रुककर आंदोलन के साथियों से मिले

पलामू में गांधीजी का प्रवास केवल स्वागत और औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा. छेदीलाल सर्राफ के बगान में ठहरने के दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थानीय लोगों से मुलाकात की. वह उनसे बातचीत करते और उनका उत्साह बढ़ाते थे. इस दौरे के जरिए राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर भी प्रोत्साहन मिला. गांधीजी की यात्रा ने पलामू को उस समय चल रही व्यापक राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने में भूमिका निभाई.

परिवार के पास भी बची हैं पुरानी यादें

तत्कालीन नागरिक मंच के अध्यक्ष जयवंश सहाय के पौत्र और स्वतंत्रता सेनानी नीलकंठ सहाय के पुत्र अमित सहाय के अनुसार, गांधीजी की पलामू यात्रा से जुड़ी कई यादें उनके परिवार से जुड़ी रही हैं. उन्होंने बताया कि उनके दादा के नेतृत्व में नागरिक मंच ने गांधीजी का अभिनंदन किया था और उन्हें स्मारपत्र सौंपा था. अमित सहाय ने गांधीजी के छेदीलाल सर्राफ के बगान में ठहरने और आंदोलन से जुड़े लोगों से मिलने की जानकारी भी साझा की.